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एक्टिंग स्कूल

January 12th, 2012 No comments

लेखिका : श्रेया आहूजा

हेलो दोस्तो, आपको श्रेया का नमस्कार… फिर से आपके सामने पेश है एक लण्ड कठोरी फ़ुद्दी पिपासु कहानी !

यह कथा है मेरी सहेली जूली की ….

हम दोनों प्लस टू पास करके वूड्स एक्टिंग स्कूल में जाया करती थी।

बहुत दिनों से जूली नहीं आई, मालूम चला कि वो बीमार है तो मैं उसे मिलने चली गई।

मैं : जूली, तू कहाँ रहती है यार आजकल? एक्टिंग स्कूल भी नहीं आ रही?

जूली : कुछ नहीं यार ! बस अब नहीं जाना, वहाँ अच्छे लोग नहीं हैं !

मैं : क्यूँ? अब क्या हुआ … पिछले बार की तरह अब किसी ने तुम्हें छेड़ दिया?

जूली : इस बार तो उससे भी बुरा हुआ ..

मैं : अब यह मत कहना किसी ने तुम्हें चोद दिया?

जूली : बस ऐसे ही समझ लो … याद है उमराव जान वाला रोल? जो तुम्हें मिलने वाला था?

मैं : हाँ ! पर वो तो सर ने तुम्हें दे दिया था … मुझे तुम पर बहुत गुस्सा भी आया था… लेकिन हुआ क्या मेरी रानी?

जूली : तुम्हें तो पता है कि उस कहानी में कुछ डाकू उमराव जान को उठा कर ले जाते हैं?

मैं : हाँ ! और उसके साथ ज़बरदस्ती करते हैं … तो वो तो एक्टिंग है न यार?

जूली : हाँ एक्टिंग तो थी … सर का मूड ऑफ था ! उन्हें इस शो से बहुत उम्मीद थी, तो हमें देर रात तक प्रैक्टिस करनी थी।

मैं : अच्छा फिर ज़रा विस्तार से बता मेरी जानेमन !

जूली : देख मजाक उड़ाना है तो फिर जा … मत सुन !

मैं : अच्छा अच्छा सॉरी …बोलो भी अब?

जूली …. मैं देर रात तक वहीं थी, विक्की सुमित और करन डाकू बने थे .. वो मुझे उठा कर ले जाते हैं पीछे के मैदान में !

मैदान का दृश्य :

विक्की : देख यार जूली ! यह तो एक्टिंग है ! बस रिलैक्स रहना ! हम कौन सा तेरा रेप कर देंगे?

जूली : देखो, ज्यादा होशियार मत बनो ! मुझे तुम लड़कों का अच्छे से पता है !

सुमित : फिर बेहतर होगा कि तुम जाओ और किसी और को मौका दो… श्रेया तुमसे तो बहुत अच्छी एक्टिंग करती है !

जूली : ऐसी बात नहीं है, मैं बेहतर हूँ ….दिखने में भी और एक्टिंग में भी !

करन : ओ के ! देखते हैं … आगे के दृश्य में बिल्लू यानि सुमित ऊपर चढ़ कर तुम्हें मारेगा !

जूली : ठीक है ! पर मुझे ज्यादा छूना-वूना पसंद नहीं ….संभल कर !

सुमित : ऊपर चढ़ कर … (एक्टिंग) चल, अपने कपड़े उतार ! वरना ?

जूली : (एक्टिंग) तुम मेरे सारे गहने ले लो पर मुझे छोड़ दो !

विक्की : (एक्टिंग) गहने नहीं ! हमें तुम्हारी जवानी चाहिए !

सुमित : (एक्टिंग) यह ऐसे नहीं मानेगी… ले चलो इसे !

वो मुझे बगल के छोटे से कमरे में ले गए और मेरे लाख मना करने पर भी मेरे कपड़े उतार दिए… मैं सिर्फ ब्रा पैंटी में रह गई थी !

मैं : देखो, मुझे जाने दो ! मुझे पता है कि यह एक्टिंग नहीं है … वरना सर को बोल दूँगी !

करन : देखो जूली, सर ने ही हमें कहा है ऐसा करने को ! वरना तुम स्टेज पर खुल नहीं पाओगी !

मैं : जाने दो मुझे ! वरना मैं शोर मचाऊँगी।

तभी खान सर आ गए …

खान सर : शोर करना है तो फिर जाओ … जूली अगर मेरा यह शो फ्लॉप गया मैं सड़क पर आ जाऊँगा …

मैंने झट से अपने कपड़ों को उठाया और अपना वक्ष को ढका।

मैं : सर आप श्रेया को रख लीजिये .. मुझे कोई शौक नहीं ऐसा गन्दा शो करने का !

खान सर : कौन से मेरे शिष्य तुम्हारी इज्ज़त उतार रहे हैं? और तुम्हारे अंकल से ही पूछ कर हम तुम्हारे साथ ऐसा कर रहे हैं ! यकीन नहीं है तो पूछ लो ! ..करन बेटा, ज़रा इसके अंकल को फ़ोन लगाना …

अंकल : हेलो..

मैं : अंकल, ये लोग मेरे साथ …?

अंकल : अरे बेटा, यह तो एक्टिंग है … वास्तविक जीवन में हिरोइनें बनने के लिए लड़कियाँ न जाने क्या-क्या करती हैं !

मैं : मुझे नहीं करना यह सब …! मैं घर आ रही हूँ !

अंकल : ख़बरदार जो इस शो को छोड़ा तो .. देख बेटी, तेरी माँ बीमार है … दवाई दारू का पैसा कहाँ से आयेगा?

मैं : इसका मतलब मैं अपना शरीर बेच दूँ …आप मेरे दलाल हैं क्या?

अंकल : नीच … यह एक्टिंग है खान अंकल के चलते हमारा घर चलता है ! तेरा बाप तो तेरे पैदा होते ही किसी और के साथ भाग गया था …वो इस एक्टिंग के पूरी पन्द्रह हज़ार दे रहा है और देव साहब भी आ रहे है शो देखने ..हो सकता है तुम्हें छोटा मोटा फिल्म में रोल मिल जाये और हमारी किस्मत चमक जाये?

मैं : लेकिन अंकल ….

अंकल : देख बेटी तेरे ही तो सहपाठी है … एक्टिंग ही तो करनी है और कौन सा असली शो में तेरे कपड़े खुलेंगे .. यह प्रैक्टिस तो सिर्फ़ इसलिए कि तू शो में खुलकर एक्टिंग कर सके… अब चलो दो दिन तक मन लगा कर खान अंकल से एक्टिंग सीखो … बाय

खान सर : चलो अब तुम सुमित इसे ज़मीन में गिराकर एक ज़ोरदार किस करो !

सुमित मुझे जमीन पर लिटा कर मेरे गालों को चूमता है …

खान सर : साले किस मतलब जानता है…? होंठों पर दे चुम्बन … ठहर, मैं दिखाता हूँ ..

खान सर ने मेरी जांघों को पकड़ा और मेरे होंठों से होंठों को मिलकर मुझे चूमा …

एक एक करके तीनों ने उसी तरह प्रैक्टिस की .. सब मिलकर मुझसे सुख भोग रहे थे …

सर ने सुमित से कहा- अपने कपड़े खोलकर और सिर्फ अंडरवीयर पहन कर इसके ऊपर चढ़ कर घस्से मारो !

सुमित ने वही किया … मेरी जांघों को फैलाया और घस्से मारने लगा …

सर : ऐ कभी लड़की नहीं चोदी क्या ..? पता नहीं घस्से कैसे मारे जाते हैं …?

सुमित : नहीं सर ! अब तक मौका नहीं मिला … आज पहली बार किसी लड़की को इतने कम कपड़ों में देख रहे हैं !

विक्की : सर मैंने भी नहीं किया … और न ही करन ने किया !

सर : तुम तीनों की उम्र लगभग क्या होगी ?

विक्की : सर, इक्कीस साल !

सर : और तेरी लड़की ?

मैं : (अपनी जांघें सिकोड़ते हुए) सर, बीस साल !

सर : कमाल की बात है कि अब तक तुम सबने यौन भोग नहीं चखा …? चल तू अब है तो कम से कम इनको सारे कपड़े खोलकर तो दिखा … पीछे घूम ! पहले तेरी ब्रा उतारता हूँ …

मैंने वैसा ही किया … सर ने मेरी ब्रा उतार दी … और मेरे मम्मों पर हाथ फेरते गुए बोले- … एक एक करके छुओ !

मेरे बदन में जैसे एक बिजली सी दौड़ गई !

विक्की : सर कितना मुलायम चीज़ है …. चूसने को दिल कर रहा है !

सुमित (मेरे चुचूक अपनी उंगलियों में दबाते हुए) : सर अगर इसके अंगूर इतने प्यारे हैं फिर बुर कितनी अच्छी होगी !!

मेरी जांघों के बीच सरसराहट सी होने लगी थी …

सर ने मुझे खड़ा किया और मेरी पैंटी मुझसे पूछे बिना खोल दी … मैंने अपना चेहरा हाथों से छुपा लिया उस समय मुझे बहुत गन्दा लग रहा था, विक्की सुमित और करन ने एक एक कर मेरी बुर को छुआ और मुझसे एक बार सेक्स करने को कहा …

सर : तुम्हारी बुर तो कुंवारी लगती है? क्या आज तक कभी सेक्स नहीं किया?

मैं : नहीं सर … (मैंने झट से अपनी पैंटी और ब्रा पहन ली)

सर : चलो अब तुम तीनों अपने कमरे में जाओ .. क्या कहा सुना नहीं? यह कुंवारी बुर है … तुम जैसे नौसीखवा के हाथ लग गई तो फिर इस बुर का बुरा हाल हो जायेगा !

सुमित : मतलब सर?

सर : मतलब के बच्चे … नथ उतरना मामूली बात नहीं … बड़े ध्यान से कुंवारी बुर को मारा जाता है … चलो अब तुम तीनों अपने कमरे जाओ और आराम करो ..जूली को थैंक्यू बोलो जिसने अपने हुस्न और आबरु को तुम्हें दिखाया ….

तीनों चले गए … मैं भी पास वाले कमरे में जाने लगी … मेरा बुरा हाल था .. मेरे बुर से रस की धार बह रही थी ! न जाने क्या हो गया था मुझे … काश सर मान गए होते ! मुझे भी चुदने का पागलपन हो गया था … बावली हो गई थी .. मैंने फैसला कर लिया था आधी रात को मैं तीनों के पास अपनी काया-मर्दन के लिए जाऊँगी पर सर की बात खटक रही थी … नथ वाली बात …

तभी सर मेरे पीछे आ कर खड़े हो गए …

सर : क्यूँ बेटे, क्या हुआ …? पीछे से तुम बिल्कुल गीली हो गई हो … रिस रहा है क्या?

मैं : सर अब क्या छुपाना .. बहुत बेचैनी हो रही है …

सर : कोई बात नहीं ! होती है … आ जा … मेरे पास आ जा …

सर ने धीरे धीरे मेरे दोनों अधोवस्त्र दोबारा उतार दिए और अपने भी … मैंने पहली बार लण्ड देखा ! मोटा भूरा और आगे लाल टोपा … सर की उम्र कोई रही होगी कोई पचास की और कहाँ मैं अनछुई कच्ची कलि ?

सर : बेबी, इसे मुँह में लो .. चूसो …

मुझे एक बार चूसने के बाद उलटी आ गई ….तो मैंने मना कर दिया …

पर सर ने बड़े प्यार से मेरी बुर चाटी तो उसे कोई परेशानी नहीं हुई .. मैं मदहोश हो रही थी !

सर ने मेरी एक टांग उठाई ,,, मेरे गोलों, गोल गाण्ड को मला और एक ही झटके में लण्ड का भाला मेरी योनि में भोंक दिया …

सर : बस सांस लेती रहो ऊँचा ऊँचा ! और जाने दो और अन्दर ! अभी तो आधा सफ़र बाकी है …!

मैं : मैं मर जाऊँगी ! सर, निकाल दो …

सर : कुछ नहीं होता ! बस घस्से मारने दो … बहुत हसीन हो तुम … जवान कमसिन …

मैं : आह और मारो न घस्से सर ! नथ उतार ही दो … उनको भी बुला लो ना तीनों को ! … उनको भी मज़ा लेने दो …

सर यह सुनकर बहुत हे गुस्से में आ गए ….: क्यूँ बूढ़ा हो गया हूँ क्या मैं? … अरी, उनके जैसे कितनों के बराबर हूँ मैं आज भी … और तुझे बहुत गर्मी छाई हुई है ना? अभी बताता हूँ ….

सर ने मुझे उल्टा किया और झुका दिया … इससे पहले मैं कुछ समझती, सर ने मेरी गाण्ड में लण्ड डाल दिया।

मैं : आह सर ! नहीं इस…स एईई अह अह मैं मर जाऊँगी !

सर : यह ले साली ! यह ले … आज रात भर तेरी गांड मरूँगा … ठीक से चलने लायक नहीं रहेगी …

मैंने देखा कि मेरे गाण्ड और बुर दोनों से खून की एक धारा मेरी जांघों के बीच बह रही थी, मेरे मम्मों को सर निचोड़ रहे थे … दर्द के मारे बिहोशी छा रही थी … मेरी चीखें सुनकर तीनों करन, विक्की और सुमित आ गए …

सुमित ने किसी तरह सर को धकेला … विक्की ने जल्दी से मेरी बुण्ड और बुर को साफ़ करके मलहम लगाया और करन ने मुझे कपड़े पहनाये …

तीनों ने सर को बहुत पीटा और कभी भी एक्टिंग चूल नहीं आने की बात की और मुझे मेरे घर सही सलामत पहुँचा दिया।

जिन लोग को मैं बुरा समझी, वो कितने अच्छे निकले और अपने अंकल और खान सर को जिन्हें मैंने पूजा, वही दरिन्दे निकले !

श्रेया यानि मैं : लेकिन जो हुआ तेरी मर्ज़ी से हुआ .. मतलब सेक्स

जूली : कह सकती हो कि मैं बहक गई थी पर इस तरह से कोई करता है क्या ?

मैं : पर तू तो तीनों से सेक्स करनी की सोच रही थी, फिर कैसे करती?

जूली : पता नहीं था यार कि सेक्स इतना दुखदायी है !

मैं : सेक्स कितना सुखदायी है कोई मुझसे भी तो पूछे !!!

shreyaahujacool@rediffmail.com

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वो मस्तानी रात….-1

January 12th, 2012 No comments

लेखक : राज कार्तिक

प्रिय मित्रों..

आप सब मेरी कहानी पढ़ते हो, सराहते हो, जो मेरे लिए किसी टॉनिक की तरह काम करता है और मैं फिर से अपनी जिंदगी का एक और आनन्दित करने वाला किस्सा लेकर आपके सामने आ जाता हूँ। आज मैं एक ऐसा ही किस्सा आपको बताने जा रहा हूँ।

दोस्तों मेरी कहानी की हर घटना सत्य होती हैं बस आप लोगो का अधिक से अधिक मनोरंजन करने के लिए मैं उसमे थोड़ा सा मसालेदार तडका लगा कर आपके सामने लाता हूँ। हर कहानी के बाद मेरे पास बहुत से मेल आते हैं जिनमें यही पूछते हैं कि क्या यह कहानी सच्ची है?

यहाँ मैं आपको बताना चाहता हूँ कि सभी कहानियाँ सत्य घटनाओं पर ही हैं। बस पात्र-चित्रण आपके मनोरंजन के लिए थोड़े बहुत बदले गए हैं।

आज की कहानी भी एक सत्य घटना है जिसने मुझे वो आनन्द दिया कि मुझे घूमने फिरने का शौक लग गया।

आज से करीब सात साल पहले की बात है। तब मैं कुछ दिनों के लिए अपने एक पेंटर दोस्त के साथ एक काम का ठेका लेकर निकला था। हमारा काम होता था दीवारों पर विज्ञापन लिखना।

मैं और मेरा दोस्त पवन दोनों एक ही उम्र के कुँवारे लड़के थे। मस्ती करना हमारा सबसे पहला शौक था।

हमें एक जिले के कुछ गाँवों में जाकर वॉल-पेन्टिंग करनी थी। सो हम दोनों हर सुबह अपनी गाड़ी उठा कर निकल पड़ते और पेन्टिंग के लिए दीवारें ढूंढते। जब मिलती तो उस पर पेन्टिंग की और फिर आगे चल देते।

ऐसे ही काम के दौरान हम दोनों एक गाँव में पहुँचे। पूरा गाँव घूमने के बाद भी कोई दीवार हमें पेन्टिंग के मतलब की नहीं मिली। और जो मिली वो पहले से ही किसी न किसी कम्पनी ने बुक की हुई थी।

दोपहर तक ऐसे ही घूमने के बाद हमें अपने मतलब की एक दीवार दिखाई दी पर दरवाज़े पर ताला लगा था। पहले तो कुछ निराश हुए पर फिर सोचा कि खाना खा लेते हैं तब तक अगर कोई आ गया तो ठीक, नहीं तो कल फिर आयेंगे।

हमने उस घर के पास ही एक पेड़ की छाँव में अपनी गाड़ी खड़ी की और गाड़ी में ही बैठ कर खाना खाने लगे। तभी एक सुन्दर सी औरत ने उस घर का ताला खोला और अंदर चली गई। उसकी तरफ देखते देखते अचानक मेरा हाथ पानी की बोतल से टकरा गया और सारा पानी गिर गया।

मैंने पवन को सामने घर में से पानी लाने को कहा पर वो बोला- तूने गिराया है तो लेकर भी तू ही आ।

मैंने बोतल उठाई और उस घर की तरफ चल दिया। जैसे ही मैं दरवाज़े पर पहुँचा मेरा दिल धक धक करने लगा। दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था।

मैंने बाहर से ही आवाज़ दी,”कोई है घर पर?”

तभी अंदर से वही खूबसूरत अजंता की मूर्त जैसी हसीना दरवाज़े पर आई और बोली,”क्या चाहिए आपको?”

मुझे पानी चाहिए था तो मैंने बोतल आगे कर दी और बोला- थोड़ा पीने का पानी दे दो।

वो बोतल लेकर अंदर चली गई और मैं बाहर खड़ा उसका इंतज़ार करने लगा।

यार सच में वो एक अजंता की मूर्त ही थी- गोरा रंग, सुन्दर नयन-नक्श, छाती पर दो बड़े बड़े खरबूजे के आकार की मस्त गोल गोल चूचियाँ, मस्त बड़ी सी गाण्ड !

मैं तो देखता ही रह गया यार !

करीब दस मिनट गुज़र गए पर वो पानी लेकर नहीं आई।

मैंने एक बार फिर से उसको आवाज़ दी पर अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई। मैं दरवाज़े के थोड़ा अंदर गया।

तभी वो एक कमरे से बाहर आई और पानी की बोतल मुझे देते हुए बोली- बाहर इन्तजार करो ना ! अंदर क्यों घुसे आ रहे हो?

मैं भौचक्का रह गया।

उसने अपनी साड़ी उतार दी थी और वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। ऊपर से उसने दुपट्टा डाल रखा था। उसके इस हसीन रूप को देख कर मेरा लण्ड तो मेरी पैंट फाड़ कर बाहर आने को हो गया था। आपको तो मालूम ही है कि मैं चूत का कितना रसिया हूँ। उसका गोरा गोरा पेट देख कर तो हालत खराब हो रही थी मेरी।

“ऐसे क्या देख रहे हो..?”

उसने गुस्से में कहा तो मैं चुप चाप बोतल लेकर बाहर आ गया।

बाहर आकर मैंने पवन को उसके बारे में बताया तो वो भी तड़प उठा उसकी झलक पाने के लिए। पर वो कर तो कुछ सकता नहीं था। बहुत डरपोक जो था।

हमने खाना खाया और फिर दीवार पेन्टिंग की अनुमति लेने के लिए फिर से उस हसीना के पास जाने की बारी थी। मैंने पवन को जाने के लिए बोला तो वो डर के मारे बोला- भई, तू ही जा !

मैं तो पहले से ही उसके पास जाने का बहाना चाहता था।

मैं उसके दरवाजे पर पहुँचा और दरवाज़ा खटखटाया। वो बाहर आई। उसने अब सूट-सलवार पहन रखी थी। इस ड्रेस में भी वो बला की खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी। उसने दुपट्टा भी नहीं लिया था। बड़े से गले में से उसके खरबूजे बाहर आने को बेताब से लग रहे थे। लण्ड फिर से पैंट के अंदर करवट लेने लगा था।

“क्या चाहिए..?”

“जी…वो…वो हम वॉल-पेंटिंग करते हैं।”

“तो…?” उसने बेहद रूखे लहजे में जवाब दिया।

“आपके घर की यह दीवार पर हम लोग अपनी कम्पनी की पेंटिंग करना चाहते है अगर आपकी इजाज़त हो तो..?”

मैंने उसको समझाते हुए पूछा। वो सोच में पड़ गई। फिर अंदर चली गई बिना कोई जवाब दिए।

मैं दरवाज़े पर ही खड़ा रह गया।

वो कुछ देर में फिर से वापिस आई और बोली- मेरे ससुर घर पर नहीं हैं, वो शाम तक आयेंगे तो उनसे पूछना पड़ेगा।

“पर शाम तक तो हम इन्तजार नहीं कर सकते…”

वो फिर से सोच में पड़ गई। कुछ देर सोच कर उसने हाँ कर दी।

हम भी खुश हुए कि चलो काम बन गया। मैं थोड़ा ज्यादा खुश था कि कुछ देर तो इस हसीना के आस-पास रहने मौका मिलेगा। हमने अपना काम शुरू कर दिया। मैं साइड की दीवार पर सीढ़ी लगा कर काम कर रहा था। मैंने सीढ़ी पर थोड़ा ऊपर चढ़ कर देखा तो उसके घर के अंदर का आँगन नज़र आ रहा था। पर वो वहाँ नहीं थी।

मैं कुछ देर देखता रहा पर वो नहीं आई। पवन नीचे काम कर रहा था। जब वो नहीं आई तो मैं नीचे आने लगा ही था कि अचानक वो आ गई। वो सलवार कमीज में ही थी और उसने दुपट्टा भी नहीं लिया हुआ था। वो अपना काम कर रही थी और मैं एक टक उसको देखे जा रहा था।

तभी उसकी नज़र मेरी तरफ उठी। मैं हड़बड़ा सा गया। हड़बड़ाहट में मेरा ब्रुश आँगन की तरफ गिर गया।

मैंने क्षमा मांगी और ब्रुश पकड़ाने को कहा।

उसकी हँसी छूट गई।

उसकी हँसी सीधे मेरे दिल को चीरती हुई चली गई। मैंने उसको पटाने की कोशिश करने का मन बना लिया।

वो उठी और मेरा ब्रुश उठा कर मुझे पकड़ाने लगी। ऊपर से उसकी चूचियों का नज़ारा देख कर मेरा लण्ड मेरे कच्छे को फाड़ कर आने को मचलने लगा। वो थोड़ा ऊपर की ओर उचक कर ब्रुश पकड़ाने लगी तो ब्रुश पर लगा रंग बिल्कुल उसकी चूचियों के बीच में टपक गया।

उसकी फिर से हँसी छूट गई।

वो ब्रुश पकड़ा नहीं पा रही थी तो मैंने कहा- मैं दरवाज़े से आकर ले लेता हूँ !

और मैं जल्दी से उतर कर उसके दरवाजे पर पहुँच गया।

उसने दरवाजा खोला और मुझे बोली- अब यह रंग कैसे छूटेगा जी?

“अभी जल्दी से किसी कपड़े से साफ़ कर लीजिए, नहीं तो फिर तेल से छुड़वाना पड़ेगा।”

वो मेरे सामने ही एक कपड़ा लेकर अपनी चूचियों पर पड़ा रंग साफ़ करने लगी। कुछ रंग अंदर तक चला गया था तो वो अपनी कमीज़ के गले को हाथ से थोड़ा खोल कर अंदर से साफ़ करने लगी। उसकी उफन कर बाहर को आती चूचियाँ देख कर मेरा दिल किया कि अभी उन दूध के मदमस्त प्यालों को अपने हाथ में लेकर मसल डालूँ।

रंग साफ़ नहीं हो रहा था तो वो थोड़ा नाराज होते हुए बोली- देखो तो तुमने क्या कर दिया, अब इस रंग को कौन छुड़वायेगा?

“आप कोशिश करें ! अगर साफ़ नहीं होगा तो मेरे पास एक तेल है, मैं दे दूँगा, आप उस से साफ़ कर लेना।”

“ठीक है..” कहकर उसने मेरा ब्रुश मेरे हाथ में थमाया और अंदर चली गई। एक पल के लिए तो मैं उस बंद दरवाजे की तरफ देखता रह गया जहाँ कुछ देर पहले वो अप्सरा खड़ी थी।

मैं वापिस आकर फिर से अपनी दीवार पर काम करने लगा। अब मेरी निगाहें उस पर से हट ही नहीं रही थी और मैंने देखा कि वो भी बार बार मेरी तरफ देख रही थी। मुझे कुछ कुछ एहसास हुआ कि आग शायद उधर भी है।

मैंने कुछ सोचा और नीचे उतर कर पवन को ऊपर चढ़ा दिया और खुद नीचे का काम करने लगा।

दस-पन्द्रह मिनट के बाद वो बाहर आई। उसके हाथ में दो चाय के कप थे। उसने हमें चाय पीने को दी और बोली- चाय पीकर कप अंदर दे देना।

वो मुड़ कर अंदर जाने लगी पर तभी वो घूमी और मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी।

मुझे मामला कुछ पटता हुआ लग रहा था। हमने जल्दी से चाय पी और मैंने पवन को हाथ थोड़ा जल्दी चलाने को कहा- पवन बेटा, हाथ थोड़ा जल्दी चला नहीं तो यहीं पर रात काली करनी पड़ेगी… तुम्हारे पास तो कपड़े तक नहीं है रात को ओढ़ने-बिछाने के लिए..!

पवन मजाक में बोला- ओढ़ने-बिछाने की क्या जरुरत है, आंटी के पहलू में सो जायेंगे दोनों ! एक तरफ तुम और एक तरफ मैं..!

यह कह कर वो हँस पड़ा और मैं खाली कप उठा कर अंदर देने चल दिया।

मैंने दरवाज़ा खटखटाया तो कुछ ही देर में उसने दरवाज़ा खोला। दुपट्टा उसने इस बार भी नहीं लिया था।

मेरे से कप लेकर वो बोली- चाय कैसी लगी?

“बहुत अच्छी थी !” मैंने भी तारीफ करते हुए कहा।

“रहने दो ! झूठी तारीफ तुम शहर वालों को बहुत आती है।”

“नहीं… ! सच में बहुत अच्छी थी।”

“ऐसा क्या था इसमें जो इतनी तारीफ़ कर रहे हो?”

“आपने अपने हाथों से जो बनाई थी, अच्छी तो होनी ही थी?”

“मतलब?”

“मतलब…आप जैसी खूबसूरत औरत के हाथों की चाय तो अच्छी होनी ही थी ना?”

वो हँस पड़ी और मेरे दिल पर फिर से एक बार उसकी हँसी के साथ हिलती चूचियों देखकर छुरियाँ चल गई।

“कितनी देर का काम है तुम्हारा?”

“आधा आज करेंगे और बाकी का कल आकर.. तब तक आज वाला पेंट सूख जाएगा।”

“रात को वापिस जाओगे?”

“देखते हैं…. यह तो शाम को काम के बाद पता चलेगा।”

और फिर मैं वापिस आ गया और फिर से अपने काम पर लग गया। उस अप्सरा की आवाज मेरे कानो में मिश्री सी घोलती महसूस हुई थी मुझे। अब मेरा दिल काम में नहीं लग रहा था। मैंने पवन को फिर से नीचे उतारा और खुद फिर से ऊपर की दिवार पर काम करने लगा। मेरा ध्यान बार बार आँगन में घूमती हुई उस अप्सरा पर ही था जो अब बार बार मुझे देख देख कर मुस्कुरा रही थी।

मैंने दिल ही दिल तय कर लिया कि जैसे भी हो, आज रात को यही रुकना है। मैंने काम की रफ़्तार कम कर दी। फिर कुछ सोच कर गाड़ी के पास गया और गाड़ी की एक तार निकाल दी ताकि वो जब स्टार्ट करने लगे तो स्टार्ट ना हो।

ऐसे ही काम करते करते शाम के सात बज गए और अँधेरा भी हो गया। मैं पानी लेने के बहाने से फिर उसके घर के दरवाजे पर पहुँच गया। मैंने उससे पीने के लिए पानी माँगा तो उसने मुझे अंदर आने के लिए कहा। मैं उसके पीछे पीछे आँगन में चला गया।

मैंने उससे पूछा- तुम घर पर अकेली हो? बाकी घर के लोग कहाँ गए हुए हैं?

तो वो बोली- मेरे सास-ससुर एक रिश्तेदार की शादी में गए हुए हैं और मेरे पति आर्मी में हैं और वो अपनी ड्यूटी पर गए हुए हैं।”

“मतलब आज रात तुम अकेली हो?”

“हाँ…” उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

कहानी जारी रहेगी !

Sharmarajesh96@gmail.com

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वो मस्तानी रात….-2

January 12th, 2012 No comments

लेखक : राज कार्तिक

मैंने उससे पूछा- तुम घर पर अकेली हो? बाकी घर के लोग कहाँ गए हुए हैं?

तो वो बोली- मेरे सास-ससुर एक रिश्तेदार की शादी में गए हुए हैं और मेरे पति आर्मी में हैं और वो अपनी ड्यूटी पर गए हुए हैं।”

“मतलब आज रात तुम अकेली हो?”

“हाँ…” उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

अब तो सारी ढील मेरी तरफ से थी उसने तो साफ़ रास्ता दे दिया था।

रात को सामन समेट कर मैंने और पवन ने सामान गाड़ी में रखा। वो अपने दरवाजे पर खड़ी हमें देख रही थी। पवन गाड़ी स्टार्ट करने लगा और मैं बगल में बैठ गया। पर गाड़ी में तो मैं पहले ही अपने हाथ चला चुका था तो भला कैसे स्टार्ट होती। पवन कोशिश करता रहा पर गाड़ी स्टार्ट तो होनी ही नहीं थी।

मैं गाड़ी से उतर गया और पवन को बोला- भई, गाड़ी तो खराब हो गई लगती हैं। लगता है आज यहीं रुकना पड़ेगा।

मैंने यह बात उस अप्सरा को सुनाते हुए कही थी। मेरी बात से उसके मुरझाते चेहरे पर फिर से मुस्कराहट चमक उठी।

मैं उसके पास गया और बोला- लगता है हमारी गाड़ी खराब हो गई है। क्या हम आज रात आपके घर पर रुक सकते हैं?

वो कुछ नहीं बोली और मुस्कुरा कर अंदर चली गई।

उस अप्सरा का नाम ममता था। यह हमें वहाँ रात को रुकने पर पता लगा।

तभी ममता की आवाज आई और उसने मुझे अंदर बुलाया, वो बोली- तुम दोनों खाना खा लो, फिर मैं तुम्हारे सोने का इंतजाम कर देती हूँ।

मैंने पवन को आवाज लगाई। पवन के आने के बाद हम दोनों ने खाना खाया। हल्की गर्मी के दिन थे तो पवन बोला- गाड़ी में सामान पड़ा है, मैं तो गाड़ी में ही सो जाऊँगा।

मैं तो खुद भी यही चाहता था।

ममता ने पवन को ओढ़ने के लिए कम्बल दिया और पवन उसे लेकर गाड़ी में सोने चला गया। आप में से जो लोग गाँव से हैं उन्हें पता होगा कि गाँव की रात बहुत जल्दी शुरू हो जाती है।

फिर उसने मेरे लिए बाहर आँगन में बिस्तर लगा दिया। करीब एक घंटे के बाद वो हाथ में दूध का गिलास लेकर आई। उसने अब एक ढीला सा सलवार कमीज पहन रखा था। नीचे ब्रा जैसे कोई चीज़ नहीं थी। इसका एहसास उसकी हिलती हुई चूचियों से हो रहा था।

गिलास मुझे देकर वो मेरी चारपाई पर ही बैठ गई। फिर हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे।

मैंने उससे उसके परिवार के बारे में पूछा और उसने मुझ से मेरे।

बातें करते करते उसके पति के बारे में बात होने लगी और फिर बात सेक्सी होती चली गई।

“तुम कैसे रहती हो अपने पति के बिना?”

“बस काटनी पड़ती है राज… नहीं तो अलग कौन रहना चाहता है !”

“तुम्हारा दिल नहीं करता?”

“दिल किस लिए ???”

“सेक्स के लिए?”

वो थोड़ा शरमाई फिर धीरे से बोली,”दिल तो सबका ही करता है, मैं कोई अलग थोड़े ही हूँ।”

मैंने मौके का फायदा उठाते हुए अपना हाथ उसके हाथ पर रखा तो वो थोड़ा कांप सी गई।

पर उसने हाथ हटाया नहीं था। मैं उसका हाथ धीरे धीरे सहलाने लगा। वो गर्दन को झुकाए मेरे थोड़ा सा और करीब आ गई। अब मेरे हिम्मत करने की बारी थी और मैंने हिम्मत करते हुए अपने हाथ से उसकी ठुड्डी को ऊपर करते हुए उसकी आँखों में देखा तो उसने आँखें बंद की हुई थी।

मैंने उसका चेहरा पकड़ कर थोड़ा अपनी तरफ खींचा तो महसूस हुआ कि उसकी साँसें बहुत तेज तेज चल रही थी। मैंने अपने होंठ उसके कांपते हुए होंठों पर रख दिए। होंठ छूते ही वो एकदम से खड़ी हो कर अंदर भाग गई और उसने दरवाज़ा बंद कर लिया।

मैं उसके पीछे पीछे गया और उससे दरवाज़ा खोलने की गुज़ारिश की- प्लीज ममता…दरवाज़ा खोलो ना, मुझे मालूम है कि तुम्हें मेरी जरुरत है..

“नहीं राज… मैंने आज तक अपने पति को धोखा नहीं दिया है… मुझे अपने पत्नी धर्म से मत डगमगाने दो…!”

“प्लीज़ ममता…”

मैंने दरवाजा थोड़ा सा अंदर धकेला तो अंदर से कुण्डी नहीं लगी थी। मैं दरवाजा धकेल कर अंदर चला गया। अंदर बिस्तर पर ममता बैठी थी। मैंने ममता के कंधों पर हाथ रखा और उसको अपनी तरफ घुमाया। वो एकदम से मुझ से लिपट गई। मैंने एक बार फिर उसका चेहरा ऊपर किया और अपने होंठ ममता के रसीले होंठों पर रख दिए।

इस बार ममता ने मुझे नहीं हटाया बल्कि वो चूमा-चाटी करने में मेरा पूरा साथ देने लगी। मैंने अब उसको खड़ा कर लिया था। ममता उम्र में मुझे से बड़ी थी। होंठ चूसते चूसते मैंने अपना एक हाथ ममता के बड़े खरबूजे के आकार की चूची पर रख दिया और सहलाने लगा।

ममता की चूची एकदम मक्खन के जैसे मुलायम थी। मैंने एक हाथ से ममता का कमीज ऊपर उठाया और उसकी चूची को बाहर निकाला। चूचियों पर भूरे रंग का एक रूपये के सिक्के जितना बड़ा एरोला और छोटे छोटे चुचूक ! ममता के चुचूक तन कर खड़े हो गए थे।

मैं उसकी चूची को मुँह में भर कर चूसने लगा।चूची पर होंठ लगते ही ममता की दबी हुई आग भड़क उठी और उसने मेरा सिर अपनी मुलायम मुलायम चूची पर दबा दिया। मैं अब ममता को ज्यादा देर तड़पाना नहीं चाहता था इसलिए मैंने अगले ही पल एक एक करके ममता के सारे कपड़े उतार दिए। उसने सलवार कमीज के नीचे कुछ भी नहीं पहना था।

सलवार उतार कर जब मैंने ममता की चूत पर हाथ रखा तो वो पूरी गीली और चिकनी थी। शायद ममता ने आज दिन में ही चूत साफ़ की थी।

“मुझे तो नंगा कर दिया? अब अपने कपड़े भी तो उतारो !”

ममता के कहने के बाद मैंने बिना देर किये अपने सारे कपड़े उतार कर एक तरफ़ रख दिए। मेरा फनफनाता लण्ड अब ममता की आँखों के सामने था।

“अरे बाप रे… तुम्हारा तो बहुत बड़ा और मोटा है…?” ममता ने हैरान होते हुए कहा।

“क्यों फौजी का मेरे से छोटा है क्या ??”

“नहीं… लण्ड तो फौजी का भी बहुत बड़ा है पर तुम से थोड़ा तो छोटा जरुर होगा। तुम्हारा तो बहुत डरावना लग रहा है।”

अब ममता थोड़ा खुलने लगी थी। मैं भी अब ममता के साथ बिस्तर पर लेट गया। ममता अपना सिर मेरे सीने पर रख कर मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी और बोली- राज, आज जब तुम आये थे तो ना जाने क्यों तुम्हे देख कर मेरा दिल बेचैन हो रहा था। मुझे क्या पता था कि आज की रात मैं तुम्हारी बाहों में बिताऊँगी।

बातें बहुत हो चुकी थी और अब बारी कुछ करने की थी। मैंने ममता को बिस्तर पर सीधा लेटाया और उसके होंठो से शुरू करते हुए उसके बदन के एक एक हिस्से को चूमने लगा। पहले मैंने उसके होंठ चूमे फिर उसकी गर्दन और कंधों को चूमा। फिर मैंने ममता की दोनों चूचियों को बारी बारी से चूमा, फिर ममता की नाभि की चूमा।

मेरे चुम्बन से ममता गर्म हो रही थी और सीत्कारें भर रही थी। ममता की सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगी थी। मेरे होंठ लगातार नीचे की तरफ बढ़ते जा रहे थे। नाभि के बाद अगला नम्बर ममता की चिकनी जांघों का था। मैं जीभ से चाटते और चूमते हुए नीचे बढ़ रहा था। मैंने ममता की टांगों को थोड़ा फैलाया और अपने होंठ ममता के निचले होंठ यानी ममता की योनि पर रख दिए। चूत पर होंठो को महसूस करते ही ममता चिहुँक उठी और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया जैसे मेरे सिर को ही अपनी चूत में घुसा लेना चाहती हो।

ममता की चूत बहुत पानी छोड़ रही थी। ममता ने दिन में ही अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे। जिस कारण चूत एक दम नई नवेली कुंवारी लड़की की चूत जैसी दिख रही थी।

मैं मस्त होकर ममता की चूत चाटने लगा। बहुत रसीली चूत थी उसकी। वो भी अब मेरे लण्ड को पकड़ कर सहला रही थी और मस्ती के मारे लण्ड को पकड़ पकड़ कर खींच रही थी अपनी तरफ। मैंने घूम कर अपना लण्ड ममता के मुँह के पास कर दिया और उसने भी बिना देर किये झट से मेरा लण्ड अपने होंठो में दबा लिया और लोलीपॉप की तरफ चूसने लगी। अब सीत्कार निकलने की बारी मेरी थी। ममता पूरी तरह से मस्त होकर लण्ड चूस रही थी और मैं भी उसकी चूत को चाट रहा था। मस्ती कुछ ज्यादा ही हावी हो गई और ममता मेरे मुँह पर ही झड़ गई। उसकी चूत से ढेर सारा अमृत निकल कर मेरे मुँह पर फैल गया। मैं उसका सारा पानी चाट गया।

तभी मेरे लण्ड में भी हलचल होने लगी। मैंने ममता को लण्ड छोड़ने को कहा- आह्ह्ह….ममता… मेरा निकलने वाला है।

पर ममता ने लण्ड नहीं छोड़ा और मेरे लण्ड में ममता के मुँह में ही पिचकारी मार दी। ममता मेरे वीर्य का कतरा कतरा चाट गई। एक बूंद भी नीचे नहीं गिरने दी।

हम दोनों झड़ने के बाद थोड़ा ढीले पड़ गए और एक दूसरे की बाहों में लेट गए। कुछ देर बातें करने के बाद फिर से हम दोनों के जिस्म में गर्मी आने लगी थी। अब मैं ममता की चूचियों को चूस रहा था और ममता मेरे लण्ड को सहला रही थी जो कि अब फिर सर तान कर खड़ा हो चुका था। ममता एक बार फिर से नीचे हुई और लण्ड को चूसने लगी। मैंने भी ममता की चूत को अपने थूक से गीला किया और दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा।

कुछ देर के बाद ममता बोली- राज, जल्दी से कुछ कर… अब और बर्दाश्त नहीं होता।

मैं भी अब और ज्यादा देर नहीं करना चाहता था। मैंने ममता की केले के तने जैसी चिकनी चिकनी टाँगें अपने कंधे पर रख कर लण्ड को ममता की चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्का लगा दिया। ममता की चीख निकल गई। चूत बहुत कसी थी, लण्ड मुश्किल से एक दो इंच ही घुस पाया था। मैंने बिस्तर के सिरहाने रखी तेल की बोतल से थोड़ा सा तेल लण्ड और चूत के संगम पर टपकाया और एक और धक्का ममता की टाँगे कस कर पकड़ते हुए लगा दिया। लण्ड आधा ममता की चूत में घुस गया था। ममता के चेहरे पर दर्द की लकीरें नजर आने लगी थी। पर मैं तो इतनी मस्त और कसी चूत पाकर फ़ूला नहीं समा रहा था। मैंने दो तीन धक्के और लगाए और पूरा लण्ड ममता की चूत में पिरो दिया।

जैसे ही मेरा पूरा लण्ड ममता की चूत में घुस कर ममता की बच्चेदानी से टकराया, ममता ने मुझे कस कर अपने से लिपटा लिया। ममता दर्द और मस्ती के संगम में गोते लगा रही थी।

मैं कुछ देर के लिए रुका और ममता के होंठ चूमने लगा और ममता की चूचियों को सहलाने और मसलने लगा। कुछ ही देर में ममता का दर्द कुछ कम हुआ और वो अपनी गांड उचकाने लगी। सिग्नल मिलते ही मैंने भी पहले हल्के-हल्के और फिर तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए।

ममता की सीत्कारें रात के सन्नाटे में मादकता की महक घोल रही थी। आह्ह्ह उम्म्मम्म आह्ह्ह ओह्ह्ह आह्ह्ह बस कमरे में ऐसी ही आवाजें गूंज रही थी। कमरे में चारों तरफ मस्ती का आलम था। मैं पूरे जोश के साथ ममता की चूत को अपने लण्ड से रगड़ रगड़ कर चोद रहा था और वो भी गाण्ड उछाल उछाल कर लण्ड को अंदर ले रही थी। उसकी चूत मेरे लण्ड को अंदर जकड़ रही थी। चुदाई बहुत लम्बी चली और बहुत देर के बाद ममता का शरीर एक बार अकड़ा और ममता के चूत के रस ने मेरे टट्टे भिगो दिए। अब मैं भी अपने आप को ज्यादा देर नहीं रोक सका और पाँच मिनट के बाद ही मेरा लण्ड भी अपने वीर्य की पिचकारियाँ ममता की चूत में छोड़ने लगा और ममता की चूत पूरी भर दी। वीर्य के गर्म एहसास से ममता एक बार फिर से झड़ गई और लण्ड और चूत के रस से सराबोर फच्च फच्च की आवाज कमरे की मादकता को बढ़ाने लगी।

झड़ने के बाद हम दोनों सुस्त होकर लेट गए।

ममता बोली- राज, जानते हो मैंने शादी के बाद पहली बार अपने पति के साथ धोखा किया है… पर मुझे अफ़सोस नहीं क्यूंकि मैंने अपनी जवानी एक तगड़े मर्द के हाथो में दी है… तुम मुझे सारी उम्र याद रहोगे।

मैंने भी ममता को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठो पर होंठ रख दिए।

कुछ ही देर के बाद मेरा शेर फिर से दहाड़ने लगा और ममता का और मेरा एक बार फिर संगम हो गया। उस रात हम दोनों सुबह तक नहीं सोये और सारी रात चुदाई का आनंद लिया। वो मस्तानी रात मुझे आज तक नहीं भूली। पर मुझे इस बात का भी बहुत अफ़सोस है कि मैं ममता को दुबारा कभी नहीं मिल पाया। ऐसा नहीं है कि मैं दुबारा उसको मिलने नहीं गया पर जब भी मैं गया वो अकेली नहीं मिली। आज ममता दो बच्चो की माँ है और खुश है। अब तो मैं भी उसकी खुशहाल जिंदगी में दखल नहीं देना चाहता।

यह कहानी कैसी लगी, जरूर बताना, मुझे आपके मेल का इन्तजार रहेगा।

आपका अपना राज

Sharmarajesh96@gmail.com

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रूम पार्टनर से मरवाई

January 12th, 2012 No comments

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा सलाम !

यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम अवनीश यादव है, मैं कम्पयूटर साइंस तृतीय वर्ष का छात्र हूँ। बात उन दिनों की है जब मैंने अपनी बारहवीं की परीक्षा पास करके बी. टेक. में प्रवेश लिया था। मैंने होस्टल में रहना तय किया क्योंकि मैंने सुन रखा था कि हॉस्टल की जिन्दगी बड़ी बिंदास होती है। रसिक तो मैं था ही परन्तु रैगिंग के कारण बहुत डर भी लग रहा था। लेकिन वहाँ के नए-नए दोस्तों से मिलकर थोड़ा अच्छा भी लग रहा था। मेरे हॉस्टल में जो कमरे थे उनमें दो छात्र एक साथ रहते थे। जब मैं होस्टल में आया तो उस समय तक मैं अपने कमरे में अकेला ही था एक हफ्ते के बाद एक दिन जब मैं कालेज से वापस आया तो मैंने देखा कि मेरे कमरे में एक लड़का बैठा था उसके साथ एक 60-62 साल का आदमी भी था।

मेरे पूछने पर पता चला कि वो लड़का मेरे कमरे में रहेगा और वो आदमी उसके दादाजी थे, उसके दादा दूसरे दिन ही चले गए।

दो-तीन दिन में ही मेरी मेरे पार्टनर से ठीक ठाक पहचान हो गई और हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए। मेरा पार्टनर आई.टी. से था और उसका नाम मनोज था, लोग उसे पंडित कहते थे। पंडित देखने में बहुत ही सुँदर और गठीला था। जब वो सुबह बाथरूम से नहा कर आता था तो मुझे उसकी भीगी हुई अंडरवीयर से उसका लंड और उसकी गोलियाँ महसूस होती थी और मेरा मन मचल उठता था। यहाँ मैं एक चीज़ बता देना चाहता हूँ कि मै शुरू से ही गाण्डू था और मैंने अपने गाँव में कई लड़कों को पटाया था और मौका मिलते ही मैं उनसे गाण्ड मरवाया करता था लेकिन यहाँ आकर मेरी यह कामना दब सी गई थी लेकिन अपने पार्टनर का लौड़ा देखने के बाद से मेरी पुरानी इच्छा फिर से जाग उठी थी और मैं उससे गांड मरवाने का मौका तलाश रहा था।

मैंने उसे पटाने की कोशिश शुरू कर दी।

एक दिन जब वो रात में सो रहा था तो मैंने धीरे से उसके पैंट की जिप खोलकर उसका लौड़ा बाहर निकाल लिया। उसका लौड़ा देखते ही मैं दंग रह गया। उसका लौड़ा एकदम काला और मोटा, छः इंच लम्बा सुप्त अवस्था में ही था। उसे देखकर मेरी गाण्ड रोमांच से भर गई और धीरे-धीरे मैं उसे सहलाने लगा।

मेरा मन तो कर रहा था कि उसका लौड़ा मुँह में लेकर उसे आइसक्रीम की तरह खूब चूसूं लेकिन डर रहा था कि कहीं मेरा पार्टनर जाग न जाये इसलिए केवल हाथ से ही सहला रहा था।

लेकिन फिर मैंने धीरे से उसका लौड़ा मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगा। मेरा पूरा ध्यान उसके लण्ड पर था पर वास्तव में मेरा पार्टनर नींद से जाग चुका था और एकदम जोश में आ चुका था।मैंने जैसे ही देखा कि वो जाग चुका है तो मैं डर गया और उससे माफ़ी मांगने लगा।

लेकिन उसने कहा- तू साले डर मत ! मैं किसी से नहीं कहूँगा, बस तुम एक बार अपनी गान्द मुझसे मरवा लो !

बस मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई थी। मैंने उसे ऊपर से नीचे तक खूब चूमा और उसका लौड़ा मुँह में लेकर खूब चूसा। थोड़ी देर बाद वो उठा और वैसलीन की डिब्बी ले आया और मुझसे बोला- इसे मेरे लण्ड पर लगा दे।

मैंने आधी डिब्बी उसके लण्ड पर लगा दी और आधी अपनी गाण्ड में खूब अच्छी तरह से लगा दी ताकि मरवाते समय बिलकुल भी तकलीफ न हो।

फिर मैं कुत्ते की तरह लेट गया और उसने अपना लण्ड मेरी गाण्ड में डालना शुरू किया लेकिन जल्द ही मेरी ख़ुशी तकलीफ में बदल गई क्योंकि उसका लौड़ा बहुत ही मोटा और कठोर था। मुझे लगा आज तो मेरी गाण्ड ही फट जाएगी लेकिन जल्द ही मुझे बहुत ही मज़ा आने लगा और मैं उछल उछल कर उसका साथ देने लगा।

उस रात उसने तीन बार मेरी गाण्ड मारी, मुझे बहुत ही मज़ा आया।

दूसरे दिन सुबह मेरी गाण्ड बहुत ही दर्द कर रही थी और मैं कालेज भी नहीं जा पाया।

फिर हम लोगों ने कई बार गाण्ड मारने और मरवाने का खेल खेला जिसकी कहानी मैं बाद में लिखूँगा।

nehakhan8957@gmail.com

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आग

January 12th, 2012 No comments

प्रेषक : कालबॉय जॉन

हाय दोस्तो, मेरा नाम जतिन है, मैं सूरत से हूँ, यह मेरी पहली कहानी है, उम्मीद है कि सबको पसंद आएगी।

मेरी उम्र छब्बीस साल है। मैं सबकी तरह यह नहीं कहूँगा कि यह कहानी सच्ची है। यह आप खुद ही तय करना कि मेरी कहानी सच्ची है या झूठी !

अब मैं कहानी पर आता हूँ।

मेरी शादी को चार साल हो गये हैं पर मेरी पत्नी सेक्स के बारे में एकदम ठण्डी है और मैं उसके सामने बहुत ही चुदक्कड़ इंसान ! मुझे रोज चुदाई चाहिये और उसको हफ़्ते या पंद्रह दिन में एक बार !वो भी एकदम साधारण अवस्था में और फटाफट करके सो जाना बस ! कोई रोमांस नहीं !

इसलिए मैंने सोचा कि ऐसे तड़फ़ने से कुछ नहीं होगा, कहीं और कुछ न कुछ जुगाड़ करना पड़ेगा।

मैंने अपने एक दोस्त को यह बात बताई तो उसने मुझे कहा- मेरे पास एक ऐसी भाभी (सूरत में शादीशुदा औरत को भाभी कहते हैं) का मोबाईल नम्बर है। उसका पति विदेश में और तेरी तरह प्यासी भी है, पैसे वाली भी है ! वो मेरी गर्ल फ्रेंड की सहेली है।

तो मैंने उसके पास से वो नम्बर लिया और थोड़ी देर बाद मैंने वो नम्बर जोड़ा तो सामने से एक मीठी सी आवाज आई- हेलो ! कौन?

मैंने कहा- मैं जतिन ! आपकी सहेली के बॉयफ्रेंड ने मुझे आपका नम्बर दिया है।

मैंने उससे नाम पूछा तो उसने अपना नाम बताया- सोनल (नाम बदला हुआ है)

फिर हम रोज फोन पर बातें करने लगे।

जब उसको मेरी बात और मुझ पर यकीन हुआ तब उसने मुझे मिलने के लिए अपने घर बुलाया।

मैं उसके बताये ठिकाने पर पहुँचा औरच दरवाजे की घण्टी बजाई तो उसने दरवाजा खोला।

मैं तो उसे देखता ही रह गया !

क्या खूबसूरती और सादगी थी उसमें !

उसने मुझे अन्दर बुलाया, हमने खूब बातें की। उसने मेरे लिए चाय बनाई। फिर उसने कहा- तुम अब रात को यहीं रुक जाना !

मैं शाम के करीब पाँच बजे गया था उसके घर, तो मैंने कहा- ठीक है।

फिर रात का खाना उसने होटल से मंगवाया। हमने साथ साथ खाना खाया।

फिर रात के करीब नौ बजे उसने कहा- चलो नहाते हैं।

तो हम साथ साथ नहाने गए।

उसने धीरे धीरे अपने कपड़े उतारने की शुरुआत की और मेरी हालत तो गला कटे मुर्गे जैसी होने लगी।

क्या फिगर था उसका ! कयामत लग रही थी !

उसने लाल रंग ब्रा और पैन्टी पहन रखी थी। मुझसे अब अपने पर काबू नहीं हो रहा था। मैं उसके पास गया और उसकी कमर पर हाथ फेरने लगा।

फिर धीरे धीरे उसके कूल्हों और पूरे बदन पर अपना हाथ फ़िराया। वो मेरी ओर मुड़ी और मेरे होंठों को चूमने लगी, जैसे वो बरसों से प्यासी हो, ऐसे चूमने लगी।

फिर मैंने उसको पूरा नंगा किया। उसकी चूत को देखते ही मैं उस पर टूट पड़ा !

दोस्तो, मैं एक बात बता दूँ- मुझे चुम्बन करना और चूत चूसना बहुत पसंद है।

वो गर्म होने लगी ! चूत चटवाने में उसे भी बहुत मजा आ रहा था। वो एकदम कामुक आवाजें निकालने लगी और झड़ गई। फिर थोड़ी देर हम वैसे ही नहाते रहे। मैं उसे फिर से गर्म कर रहा था। थोड़ी ही देर में वो फिर से गर्म हो गई। तब हमारा चुदाई का सिलसिला शुरु हुआ।

वो दीवार की तरफ मुँह करके खड़ी थी और मैंने पीछे से उसकी चूत में अपना लण्ड डाल दिया। खड़े खड़े ही हमने शॉवर के नीचे ही चुदाई चालू कर दी।

करीब पन्द्रह-बीस मिनट के बाद सोनल और मैं साथ में ही झड़ गए।

हम नहाकर उसके बेडरूम में गये नंगे ही !

फिर हमने पूरी रात पागलों की तरह चुदाई की। मैंने उसे उस रात पाँच बार चोदा। वो रात मेरी यादगार रात रही।

फिर सुबह जब मैं वापिस अपने घर आ रहा था तो उसने मुझे पैसे देने चाहे लेकिन मैंने मना कर दिया।

तो उसने फिर से मुझे चूमा और बोली- दिल जीत लिया तुमने !

फिर उसने अपनी चार सहेलियों को मुझसे चुदवाया। वो भी मुझसे चुदवा कर खुश रहती हैं, कहती हैं- जादू है तेरे लण्ड में !

कैसी लगी मेरी कहानी? मुझे जरुर मेल करना दोस्तो ! और कोई भूल हुई हो तो माफ़ करना।

callboy_80009@yahoo.com

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पायल की बज गई पायल

January 12th, 2012 No comments

प्रेषक : रवि पटेल

सभी अन्तर्वासना पाठकों को मेरा नमस्कार !

मैं कई सालों से अन्तर्वासना पर कहानियाँ नियमित रूप से पढ़ता हूँ पर कभी मुझे अपनी कहानी लिखने का ख्याल नहीं आया। पर एक दिन एक कहानी पढ़ते पढ़ते मुझे लगा कि क्यों न मैं भी अपनी एक कहानी लिखूँ जिसमें मैं अपना अनुभव जाहिर कर सकूँ।

ज्यादा इधर उधर की बात छोड़कर मैं अपनी कहानी पर आता हूँ।

मेरा नाम रवि पटेल है, मैं सूरत(गुजरात) का रहने वाला हूँ। यह बात उन दिनों की है जब मैं अपनी पढ़ाई कर रहा था और मेरी उम्र 21 साल की थी। आज इस बात को दो साल हो गए और मैं एक नए और कभी न सोचे मुकाम पर पहुँच गया।

मैं अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपने दूर के रिश्तेदार की दवाइयों की दुकान पर जाया करता था, वहाँ से मुझे ज्यादा सीखने को मिलता था।

उस दुकान पर जब मैं रहता था तो वो रिश्तेदार कभी कभी मुझे दवाइयाँ देने के लिए मुझे अपने नियमित ग्राहकों के घर भी भेज देते थे और मैं दवाएँ पहुँचा कर आता था।

एक दिन की बात थी जब मुझे थोड़ी दूर दवाएँ देने जाना पड़ा। वहाँ जाकर मैंने घण्टी का बटन दबाया तो अन्दर से एक 32-35 साल की औरत ने दरवाजा खोला।

मैं उसे दवाएँ देकर निकल जाने की सोच ही रहा था कि उसने मुझे अन्दर आने को कहा।

मैं अन्दर गया तो देखा कि उसका फ्लैट बहुत ही आलीशान था। उसने मुझे पानी दिया और इधर उधर की बातें करने लगी, मेरे बारे में पूछने लगी- मैं क्या करता हूँ, कहां रहता हूँ, वगैरा-वगैरा।

फिर मैंने कहा- मुझे दुकान पर जाना पड़ेगा, मुझे यहाँ आए हुए काफ़ी देर हो गई है।

मैं जैसे ही निकलने लगा तो वो मुझे कहने लगी- मुझे अपना फ़ोन नंबर तो देते जाओ।

मैंने उसे अपना फ़ोन नंबर दे दिया। उसी रात को मेरे मोबाइल पर उसका फोन आया, कहने लगी- मैं पायल बोल रही हूँ।

हाँ ! मैं उसका नाम ही बताना भूल गया था- उसका नाम था पायल।

जैसा नाम वैसी ही वो दिखने में लग रही थी। ऐसा लग रहा था कि वो 26-27 साल की लड़की हो। उसका फिगर ? मानो कोई अभिनेत्री हो- 34-28-34..

उसके बोल तो जाने किसी के लिए तड़प रहे हों। उसका तौर-तरीका भी बहुत ही सलीके का था। उसके बाल एकदम रेशमी थे।

फ़ोन पर बात करते करते उसने मुझे बताया कि वो एक अच्छे दोस्त की तलाश में थी। मुझे उससे बात करने में बहुत मजा आ था। उस रात मैंने उसे याद करते करते बहुत मुठ मारी।

दूसरे दिन उसका दो बजे के आसपास फ़ोन आया कि उसे दर्दनिवारक दवा चाहिए और तुरंत।

मैं दवा लेकर उसे घर गया।

उसने दरवाजा खोला और अन्दर आने को कहा।

मैं अन्दर गया तो कहने लगी- बहुत तेज सर दर्द कर रहा है।

उस वक्त उसने सफ़ेद रंग का रात्रि-परिधान पहना हुआ था। उसमें से उसके चूचे आजाद होने को तड़प रहे थे।

वह मुझे कहने लगी- आप बैठिए, मैं चाय बना कर लाती हूँ।

वह चाय लेकर आई और हमने चाय साथ में पी। उसके बाद मैं वहाँ से निकलने के लिए तैयार हुआ कि उसने मुझे कहा- क्या तुम थोड़ी देर मेरा सर दबा दोगे?

मेरी तो बाँछें खिल गई, मैंने तुरन्त हामी भर दी।

वो मुझे अपने शयनकक्ष में ले गई।

मैंने धीरे धीरे से उसका सर दबाना शुरु किया पर मेरी नजर उसके वक्ष पर जाकर अटक जाती थी। वो भी मुझे बार बार देख रही थी वासना भरी निगाहों से।

तभी उसने मुझे नीचे झुकाया और मेरे होंठों को चूम लिया।

मैंने उसी समय उसे अपनी बाहों में भर लिया और कहने लगा- मैंने जबसे तुम्हें देखा है, तब से तुम्हें प्यार करने का मन कर रहा था ! पर ऐसा नहीं सोचा था कि यह मुकाम इतनी जल्दी ही हासिल हो जायेगा। मैंने उसे जोर से चूम लिया और उसके ऊपर आ गया।

तभी उसने कहा- मुझे कोई सर दर्द नहीं है, मैं तो तुम से मिलना चाहती थी।

मैं धीरे धीरे उसे मसलने लगा, वो भी मदहोश होती जा रही थी।

मैंने धीरे से उसका टॉप उतारा तो मैं तो जैसे बेहोश ही हो गया। उसने गुलाबी रंग की ब्रा पहनी थी, उसमें वो गजब लग रही थी ! उसके वो दो पंछी कब से आजाद होने की राह देख रहे थे।

मैं ऊपर से ही उसके चूचे दबाने लगा।

उसे बहुत ही मजा आ रहा था, वो कह रही थी- और जोर से दबाओ ! मुझे चूमो !

उसने मुझे कहा- मैं अपने पति से संतुष्ट नहीं हूँ।

और कहने लगी- मेरी जान, मुझे दुनिया की वो ख़ुशी दे दो जिसके लिए मैं सालों से प्यासी हूँ।

मैं बोला- जरूर ! तुम्हारी हर एक ख्वाहिश पूरी होगी मेरी जान !

तभी मैंने प्यार से उसका पजामा भी निकल दिया तो देखा कि उसने पैंटी भी ब्रा के साथ की ही पहनी थी। वो गुलाबी पैंटी में क्या लग रही थी !

ऊपर से ही मुझे अंदाजा हो गया कि उसकी योनि गीली हो चुकी थी बुरी तरह से। अब वो सिर्क ब्रा और पेंटी में थी, उसने मेरे भी एक एक करके सब कपड़े उतार दिए और जोर से मेरा लौड़ा चूसने लगी।

मुझे तो लगा कि जैसे मैं आसमान की सैर कर रहा हूँ, वो इतना प्यार से मेरा चूस रही थी।

तभी मैंने उसको ब्रा और पैंटी से मुक्ति दे दी और उसके उरोज जोर जोर से चूसने लगा, वो एकदम ही पागल होने लगी थी। और तभी उसने मुझे अपनी योनि चाटने को कहा।

और मैं भी उसी का इन्तजार कर रहा था। उसके बोलते ही मैंने उसकी योनि चाटना चालू किया। क्या मस्त गन्ध आ रही थी उसकी योनि में से !

उसका यौवन रस भी एकदम नमकीन लग रहा था।

मैं जोर जोर से उसकी चूत चूसे जा रहा था और उसे भी बहुत मजा आ रहा था।

वो बोली- जान, ऐसे न तड़पाओ ! मेरी जान निकली जा रही है ! मुझे अपने नौ इंच के लौड़े का मज़ा दे दो !

तभी मैंने उसे पांव फ़ैलाने को कहा, उसने ऐसा ही किया और मैं उसके ऊपर आ गया।

उसकी योनि पर मैंने अपना लिंग रखा और मैंने थोड़ी देर तक सहलाया तो वो जैसे पागल ही हो गई, बोलने लगी- अब तो रहा नहीं जाता ! मैं मर जाऊँगी, अब तो मेरी प्यास बुझओ !

मैंने एक जोर से धक्का मारा ही था कि वो चिल्लाने लगी- जान, धीरे से ! मार डालोगे क्या मुझे?

मैंने फिर धीरे धीरे से धक्के लगाना चालू किए।

पर कुछ ही देर बाद वो बोली- जोर से ! और जोर से ! आज फाड़ डालो इस चूत को ! कब से इस को प्यास लगी है लौड़े की !

मैं जोर से धक्के लगाये जा रहा था, उसे बहुत ही मजा आ रहा था। करीब दस मिनट तक ऐसे ही प्यार चलता रहा।

तभी उसने कहा- मुझे डॉग शॉट लगाओ !

मैंने उसे खड़ा किया और पीछे से डाल कर धक्का लगाया तो वो बहुत ही मदहोश हो गई।

मैं तो धक्के पर धक्का दिए जा रहा था, वो और जोर से और जोर से बोले जा रही थी। पूरा कमरा हमाती सीत्कारों और बेड के चरमराने की आवाज़ से गूंज रहा था।

करीब 15 मिनट तक यही सब चलता रहा। उसके नितम्बों को मैं दबा कर मजे लेता रहा। मेरे लिए यह एक सबसे ज्याद ख़ुशी का दिन था।

उसी दौरान वो तीन बार झड़ चुकी थी।

तभी मैंने कहा- मैं छोड़ने वाला हूँ ! कहाँ छोडूँ मैं?

तो उसने कहा- अन्दर ही जाने दो, आज तो इस प्यासी जमींन पर बरसात का तूफान आ गया ! मुझे इस तूफान में बह जाने दो।

और दो धक्का लगा कर मैंने उसकी प्यासी योनि में ही अपना वीर्य निकल दिया और हम दोनों बेड पर एक दूसरे से सट कर सो गए जैसे जन्मों-जन्म की प्यास आज बुझ गई हो।

और थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही साथ में एक दूसरे को देखते रहे।

थोड़ी देर बाद हम फिर से तैयार हो गए, एक नए अंदाज के साथ नया दौर शुरु करने को।

उस दिन हमने तीन बार मजा लिया फिर मैं उसके घर से निकलने ही वाला था तो उसने मुझस कहा- फिर कब आओगे तुम मेरी जान इस पायल की पायल बजाने को?

उसने मुझे रोका और दूसरे कमरे में से पाँच हज़ार रूपये मुझे दिए और कहा- यह तुम्हारा पहला तोहफा है !

फिर अगले दिन मुझे उसका फ़ोन आया और कहा- मेरी एक सहेली की प्यास बुझाओगे क्या मेरे राजा? वो तुम्हें बहुत पैसे देगी !

और मैं तैयार हो गया।

आज उनके ग्रुप में हरेक के साथ मैंने मजा किया है और वो सब मेरे लौड़े के आकार और मेरे अलग अलग तरीकों से बहुत खुश हैं।

मैं यह बात किसी को नहीं बताता हूँ पर मैंने उसकी मंजूरी लेकर यहाँ पर रखी है।

आज मैं जिगोलो बन गया हूँ और पूरे गुजरात में मैं अपनी सेवाएँ देता रहता हूँ।

आप को मेरी कहानी कैसी लगी? जरुर बताएँ मेरे ईमेल पर !

अगर अच्छा प्रतिभाव मिला तो और एक कहानी भेजूँगा आप सब के लिए।

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इत्तिफ़ाक से-2

January 12th, 2012 No comments

प्रेषिका : मोनिषा बसु

दोस्तो, अब कहानी का आगे का भाग आपके समक्ष प्रस्तुत है।

हम दोनों रेस्टोरेन्ट में बैठे ही थे कि वो जोड़ा हमारे सामने आ गया। दोनों ही सभ्य लग रहे थे, बिल्कुल मेरे और समीर की तरह। दोनों हमें देख कर मुस्कुराए। जवाब में हम भी मुस्करा दिये।

“यदि आपको कोई आपत्ति ना हो तो क्या हम यहाँ बैठ सकते हैं?” लड़की ने बड़ी अदा से मुस्करा कर पूछा।

“ओह, प्लीज… आईये ना !” समीर उसकी ओर देख कर बोल पड़ा।

मैंने समीर की ओर देखकर जानबूझ कर अपना मुँह बना लिया ताकि वो समझ जाये कि मुझसे बिना पूछे उसको इजाजत देना मुझे अच्छा नहीं लगा है।

वो जोड़ा सामने बैठ गया।

“हाय ! मेरा नाम मालिनी है।”

“… और मैं अमोल !” साथ वाला लड़का बोला।

“मैं समीर और ये है अमीना !” समीर ने बात आगे बढ़ाई।

“मिलकर खुशी हुई, कॉफ़ी हो जाये” अमोल ने हमारी तरफ़ देखा और सहमति पाकर कॉफ़ी के लिये कह दिया।

कॉफ़ी की चुस्कियों के साथ बातचीत होने लगी, पर अमोल की नजरें कहीं ओर ही थी और मुझे बड़ी हसरत से देखने लगता। मैं जान गई थी कि उसकी नजर मेरे यौवन पर थी, शायद मुझे चोदने की कामना करने लगा था। उधर मालिनी भी मद मस्त नजरों से समीर को मुस्करा कर देखे जा रही थी। मुझे समझ में आ गया कि कि इन दोनों ने हमारी चुदाई होते देख ली थी, जरूर ही ये चोदने चुदाने के लिये दोस्ती करना चाह रहे थे।

बातें चलने लगी, मैं भी अब अमोल को देख रही थी। मस्त सजीला जवान था। मैं उससे चुदने की कल्पना करने लगी। मैं जानती थी कि अमोल भी मुझे अपने नीचे दबा कर चोदने की बात सोच रहा होगा। इसी सोच से मेरी चूचियाँ फ़ड़क उठी। चूचियाँ कड़ी होने लगी। चूत में हलचल सी होने लगी। मुझे लगा कि यही हाल समीर और मालिनी का भी होगा।

आखिर में चलते हुये अपना कार्ड मुझे थमा दिया और हमें घर आने का न्यौता दिया और कहा कि यदि आप घर आयेंगे तो हम सभी आप लोंगो की मर्जी होने पर खूब मजे करेंगे।

मैंने समीर की ओर देखा और शर्मा कर नजरें झुका ली। समीर तो राजी लग ही रहा था, मैंने भी मुस्करा कर जमीन की ओर देखते हुये धीरे से हामी भर दी। अमोल सबका बिल चुका कर चला गया। हम दोनों बाईक पर सवार होकर उन दोनों को बाय कहा। वे भी अपनी कार से चले गये।

दो दिन के बाद हमें मिलना था। मैं तो बहुत उत्साहित थी कि अब तो मुझे एक नया लण्ड मिलेगा। समीर भी बार बार फ़ोन करके अपनी खुशी का इजहार कर रहा था।

आह्ह्ह ! मेरे तो ब्रा और ब्लाऊज जैसे तंग हो कर फ़टे जा रहे थे। सारा शरीर एक मस्ती सी गुदगुदी से मचल रहा था। चुदने की आशा में मेरी चूत बार बार फ़ड़क उठती थी। समीर दो दिन बाद अपनी बाईक लेकर सही समय पर आ गया। अभी हम दोनों की चुदाई की भूख कम नहीं हुई थी। अभी तो मैं समीर के साथ खूब चुदना चाहती थी, पर साथ ही नये युगल का आनन्द भी तो लेना था। हम दोनों ने अमोल के अपार्टमेन्ट पर पहुँच कर उसे कॉल किया। उस समय मैंने भी टॉप और जीन्स पहन रखा था। अमोल हमें लिवाने बाहर आया और फिर हम सब अमोल के घर पर बैठे हुये थे।

मालिनी ने बीयर के लिये पूछा तो हमने हाँ कर दी। हम लोग बीयर की चुस्कियाँ लेते हुये रोमान्टिक बातें करने लगे। सभी पर इश्क का रंग चढ़ते देख कर अमोल ने टीवी पर एक ब्ल्यू फ़िल्म चला दी। फिर वो मुझे देख कर मुस्कराने लगा। मैं शर्मा गई। वो उठ कर मेरी बगल में बैठ गया। मैंने धीरे से नजरें उठा कर अमोल की तरफ़ देखा। शरीर में एक मस्ती भरी लहर उठने लगी। उसने मेरे कन्धे पर हाथ रख दिया और अपनी तरफ़ दबा कर बोला- मस्त है…

“क्या…?”

“व…व… वो फ़िल्म … देखो तो दोनों कितनी मस्ती कर रहे हैं !”

उसका हाथ धीरे से मेरी छाती पर उतर आया।

हाय राम ! दबा दे मेरी चूचियाँ। मेरी छातियाँ धड़क उठी।

उधर मालिनी भी समीर से चिपक कर बैठी हुई थी। समीर उसकी चूचियाँ धीरे धीरे सहला रहा था। मालिनी का एक हाथ समीर की जांघें सहला रहा था। फिर वो लण्ड तक पहुंच गई, अब उसे धीरे से दबा दिया। बदले में समीर ने मालिनी की चूचियाँ मसल दी।

“आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्…।” कहकर मालिनी चहक उठी।

मेरा मन भी उसे देख कर मचल उठा। मैंने भी धीरे से अमोल का भारी लण्ड पकड़ लिया और उसे दबाने लगी। तभी अमोल ने मुझे उठा कर अपनी गोदी में बैठा लिया। उफ़्फ़्फ़्… उसका कड़ा लण्ड जीन्स के ऊपर से ही मेरी गाण्ड में घुसने लगने लगा था। मैं तो मदहोश हुई जा रही थी। उसने मुझे दबा कर मेरा जिस्म मसलना शुरू कर दिया और फिर धीरे से उसने मेरे अधरों पर अपने अधर रख दिये। मैं भी उससे जोर से लिपट गई और उसके होंठ चूसने लगी। उसका कड़क ताकतवर लण्ड मेरी गाण्ड पर जबरदस्त रगड़ मार रहा था। गुदगुदी के मारे मैं तो बेहाल हो गई थी।

मैंने समीर की तरफ़ देखा। मालिनी समीर की पैंट चड्डी समेत नीचे खिसका कर लण्ड मुख में लेकर उसकी मस्त चुसाई कर रही थी।

मोल ने भी अपनी पैंट नीचे खींच कर अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। फिर उसने मुझे खड़ी करके मेरी जीन्स भी नीचे उतार दी और मेरे चिकने सुन्दर गोल गोल चूतड़ों को सहलाने और दबाने और मसलने लगा। मैंने घुमा कर अपनी मस्त चूतड़ों को अमोल के चेहरे की तरफ़ करके इतराने लगी। मुझे अपने चिकने सुन्दर चूतड़ों पर नाज हो रहा था। अब वो मेरे शानदार चूतड़ों को चूमते हुये अपने दान्तो से उसे काटने लगा था। उसके यूं काटने से मुझे एक अजीब सी मस्ती छाने लगी थी। मैं बार बार चूतड़ों को मटकाते हुये माहौल को और रंगीन बना रही थी।

उधर मालिनी समीर का लण्ड मुख लिये हूम … हूम करके यूँ चाट रही थी कि जैसे उसे कभी लण्ड मिला ही ना हो। अब समीर ने मालिनी को उल्टी सुल्टी पोजिशन में लेकर उसकी चूत में अपना मुख घुसा दिया। लण्ड मालिनी ने गप से मुख में घुसा लिया। समीर का लण्ड मालिनी के सुन्दर मुख में गपागप अन्दर बाहर हो रहा था और मुख को चोद रहा था। मालिनी मादक सिसकारियाँ भरने लगी थी। मैंने भी उसे देख कर जोश में आते हुये अमोल का लण्ड खोल कर उसका सुपाड़ा अपने मुख में लेकर उसके निचले हिस्से में घुमा घुमा कर चूसने लगी, उसकी गोलियों को धीरे धीरे खींच कर उसे मतवाला बना दिया फिर अपना चूसने का कमाल देखने लगी।

फिर क्या था कुछ पलों में अमोल ने मुझे पूरी नंगी कर दिया। और मेरे ऊपर झुक पड़ा। उसने अपना लण्ड मेरी चूत से भिड़ा दिया और एक करारा धक्का लगा दिया। मेरे मुख से एक रसभरी चीख निकल गई।

तभी ट्रिंग… ट्रिंग … मोबाईल की घण्टी बज उठी।

अमोल ने एक झटके से अपना लण्ड बाहर खींच लिया। मेरे मुख से एक मीठी सी आह निकल गई साथ ही मेरी झांटें भी सुलग उठी। यह साला कौन हरामजादा अपनी बहन चुदवाने के लिये कॉल कर रहा है। लण्ड अच्छा खासा अन्दर घुसा हुआ था, साला बाहर निकाल दिया। चूत के मुख से जैसे निवाला छीन लिया हो।

2-3 मिनट के बाद अमोल वापस आया तो उसके साथ एक सुन्दर सा संजीदा जवान भी था।

“हाउ राज !” मालिनी बोल उठी। उस सुन्दर से सजीले लड़के का नाम राज था।

“हाय माय डियर !” कह कर मालिनी को उसने चूम लिया। समीर ने सब कुछ भांप लिया था। उसने मालिनी को घोड़ी बना कर अपने ऊपर लेटा लिया और मालिनी की गाण्ड के छेद को कुरेदा। फिर अंगुली में थूक लगा कर गाण्ड में घुसा कर अन्दर बाहर करने लगा। अमीशा समीर को देख कर मुस्काई और एक मीठा सा किस लिया।

“थेन्क्स समीर … पीछे आ जाओ और मेरी गाण्ड चोद दो”

समीर पीछे आ गया और अपने लण्ड के सुपाड़े को मालिनी की गाण्ड से भिड़ा कर द्बाया।

“आह्ह्ह्ह्ह्ह … चुद गई …” मालिनी के मुख से निकला। समीर का गुलाबी सुपाड़ा अपनी पूरी ताकत से गाण्ड में जगह बनाता हुया चार इंच तक घुस गया। राज अपने लण्ड को पैंट के ऊपर से ही अपने लण्ड को दबा कर मालिनी को किस करा रहा था। राज ने भी अब अपने अपने पूरे कपड़े उतार दिये और नंगा हो गया। मालिनी ने राज का लण्ड अपने मुख में लेकर पूरी तबियत से खूब चूसा।

यहाँ अमोल मेरे ऊपर पूरा छा गया। मैं मस्त हो कर अपनी प्यारी सी चूत चुदवा रही थी कि अचानक राज मेरी तरफ़ बढ़ने लगा। राज का भी लण्ड मस्त 7 इन्च का और गोरा चिट्टा था। उसे देख कर मेरे मुह में पानी आ गया।

“हाय राज !” मैं राज की तरफ़ देख कर मुस्करा दी।

वो मुस्करा उठा। मैं कभी शरारत से अमोल को देखती और कभी राज को। अमोल को समझ में आ गया कि मैं राज को साथ लेने से मना नही करूंगी। राज ने अमोल को देखा अमोल तो बस मुस्करा भर दिया। राज ने झुक कर मेरी चूचियाँ अपने मुख में भर ली। फिर उसने मेरे दोनों चूचे मसलते हुये मुझे चूमना शुरू कर दिया। अमोल तो अपना लण्ड मेरी चूत में फ़ंसा कर बैठा हुआ मेरी और राज की हरकतें देखने लगा था। अब राज ने अपना बड़ा सा लाल सुपाड़ा मेरे मुख में घुसा डाला। मैंने पूरी इमानदारी के साथ राज के लण्ड की शानदार चुसाई की। वो भी मेरी चुसाई से मस्त हो गया

“वोव्… अमीना… तुम बहुत मस्त और सेक्सी हो… चोदने के लायक हो !”

दूसरी और समीर का लण्ड मालिनी की गाण्ड की मां चोद रहा था। … और यहां दोनों के बीच मेरी गाण्ड की मां चोदने के लिये झगड़ा शुरू हो गया था। अमोल मेरे ऊपर से उठ गया और राज नीचे लेट गया। मैं इशारा समझ कर राज के लण्ड के ऊपर बैठ गई। राज का लण्ड मेरी चूत से भिड़ गया था। मैंने चूत को और दबा दिया और उसका लण्ड दो तिहाई चूत के अन्दर कस गया। अब राज ने मुझे अपने ऊपर झुका लिया और मेरे होंठ चूमने लगा। मेरे गाण्ड के छेद में अमोल की थूक भरी अंगुली गाण्ड में घूम घूम कर उसे नरम और रवां दार बना रही थी।

मैंने गाण्ड तो कई बार मरवाई थी, पर कभी दो दो लण्ड एक साथ नहीं लिये थे। यह तो पहली बार था… कि मुझे इत्तिफ़ाक से दिवाली धमाका ऑफ़र मिल गया। एक लण्ड के साथ एक लण्ड फ़्री… । दो मिनट बाद अमोल ने अपनी अंगुली निकाल कर अपना लण्ड मेरी गाण्ड पर रख कर दबा दिया।

“उफ़्फ़ … हाय राम्… मर गई … वाह्ह्ह्… ओ येस … चोद दो मेरे राजा … फ़क मी…आह्ह्ह !” अमोल और राज दोनों ही मस्ती से मेरा बाजा बजाने में लग गये थे।

“… वोव्… क्या मस्त लण्ड है … आह्ह्ह मार डाला रे … तुम दोनों मुझे बहुत प्यारे हो … आई लव … यू बोथ… मां मेरी … फ़क्… फ़क्… राजा… मुझे जोर से चोद डालो…”

आज मैं सचमुच खूब मस्त हो रही थी। मेरी सुन्दरता पर दोनों मरने मिटने लगे थे। बड़ी सुन्दर लय के साथ थाप पर थाप पड़ रही थी, सच में जैसे एक मधुर संगीत बज सा बज रहा था … शायद इसी को बजाना कहते होंगे। मेरी सुन्दरता पर दोनों ही चार चांद लगा रहे थे। दोनों ही मेरी हुस्न की सही कदर करने वाले थे … पूरा जोर लगा कर मुझे बजा रहे थे। मेरा कितना खूबसूरत कॉप्लीमेन्ट था… मुझे मसल मसल कर ठोकते हुये मेरे जोबन की मस्त चुदाई !

मैं इसी के लायक थी…

जी हां ! सुन्दर चेहरा, मस्त फ़िगर, गोल मटोल गाण्ड, चूत की गहराई…। इस शानदार जवानी की यही वास्तविक कीमत थी। कोई एक मेरे गले में मंगलसूत्र डाल कर मुझे बजाये इससे अच्छा तो यही है कि मैं अपने मनपसन्द लड़कों से बिना मंगलसूत्र के अपनी आगे और पीछे की मस्ती से बजवाऊँ।

दोनों अपनी पोजीशन बदल बदल कर मुझे ठोक रहे थे। कभी राज चूत चोदता तो कभी अमोल को मौका मिल जाता मेरी गाण्ड बजाने का। फिर दोनों के कड़क तने हुये लण्ड कुछ देर बाद बाहर आ गये और मेरे चेहरे के सामने तन्ना कर लहराने लगे। फिर मुझ पर जैसे वीर्य की पिचकारियाँ बरसने लगी। यह कोई पहली बार फ़ेस शॉवर नहीं लिया था… कई बार मैं फ़ेस शॉवर ले चुकी थी। पर यह पहली बार था कि दो दो लण्ड मेरे चेहरे को अपने वीर्य से नहला रहे थे।

“आआह्ह्ह्ह … यह हुई ना बात …” मुझे अपने चेहरे पर गिरते हुये वीर्य के कारण बहुत ही नशीलापन लगने लगा था। बीच बीच में मुख खोलने से बहुत सा माल मेरे मुख के अन्दर भी आ पड़ा था। समीर भी मालिनी के मुख पर अपना लण्ड रगड़ रगड़ कर अपना माल उसके मुख मण्डल पर निकाल रहा था। सभी मेरे चेहरे पड़े सफ़ेद गाढ़े वीर्य को देख रहे थे… फिर उन्होंने अपने हाथों से मेरे चेहरे पर वीर्य को मलना शुरू कर दिया। बीच बीच में अपनी वीर्य से भीगी अंगुली भी मेरे मुख में घुसा देते थे, जिसे मैं बड़ी मधुरता से चूस लेती थी। आह्ह्ह … मुझे अपने आप पर लड़की होने पर नाज होने लगा था… ।

“उठो अब चलो, फिर रात बहुत हो जायेगी … ” समीर ने भी झटपट कपड़े पहन लिये। वापस मिलने का वादा करके हम दोनों उसके फ़्लेट से निकल पड़े…

मोनिषा बसु

sunilnehaverma@gmail.com

दोस्तों आप लोगों को कहानी कैसी लगी? क्या आप भी मिलना चाहते हैं मालिनी से ?

तो मालिनी का फ़ोन नम्बर यहाँ से लीजिए।

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इत्तिफ़ाक़ से-1

January 12th, 2012 No comments

प्रेषिका : मोनिषा बसु

हाय दोस्तो, मेरा नाम है अंकुर ! वैसे मेरा असली नाम तो अमीना बेगम है लेकिन इन्टर्नेट पर मैं अपना नाम अंकुर ही लिखती-बताती हूँ।

मेरे सभी दोस्त कहते हैं कि मैं शर्मीली हूँ और मुझे लगता है वे सही कहते हैं। मुझे लगता है कि मैं ज्यादा आकर्षक नहीं हूँ लेकिन अगर कोई पुरुष मेरी तारीफ़ करें तो मैं बस पिंघल जाती हूँ, मेरी योनि गीली हो जाती है ! अगर आपको छोटे स्तन और एक बहुत तंग छोटी योनि पसंद हो, तो मैं आपकी ही पसंद की लड़की हूँ। और जितनी आप मेरी छोटी छोटी चूचियों, मेरी कसी हुई गाण्ड की प्रशंसा करेंगे, उतनी ही अधिक उत्सुक हो जाऊंगी मैं अपना यह सब आपको दिखाने को ! ऐसा नहीं है कि मैं अपने बदन को दिखाने में बहुत अधिक उदार हूँ लेकिन अगर कोई पुरुष मेरी पूजा करे तो उत्तेजित हो उठती हूँ ! अगर आप चाहें तो आप भी देख सकते हैं ! मुझे फोन करो और मुझे कहो तो मैं आपको अपना सब कुछ दिखा दूंगी!

जिससे मैं उत्तेजित होती हूँ : जैसे ही आप फोन करेंगे और मेरे उँगलियाँ अपने आप मेरी योनि को चूमने लगती हैं, मज़ा आता है।

मुझे एक फ़ोन करें ! मेरा फ़ोन नम्बर यहाँ है। अगर आपने मेरी अन्तर्वासना जगा दी तो मैं अपने शिक्षक यानि आपकी गुलाम हो जाऊँगी।

मैं आपको अपने मस्त यौन जीवन की एक घटना सुनाती हूँ :

एक बार मेरे भाईजान ने कहीं बाहर जाना था तो भाई सलीम ने अपना सामान बांधा और मैं भाई के साथ सामने टैक्सी स्टैन्ड पर जा खड़ी हुई। भाई को बोरीवली स्टेशन पर छोड़ना था। यहाँ से स्टेशन काफ़ी दूर था। तभी मेरे भाई के एक दोस्त ने हमें देख लिया और अपनी मोटर-बाईक लेकर हमारे पास आ गया।

“अरे… कहाँ की तैयारी है…?”

“स्टेशन तक जाना था … मैं जा रहा हूँ, यह छोटी बहन अमीना है।”

“तो मैं हूँ ना यार … उसी तरफ़ जा रहा हूँ, स्टेशन पर छोड़ दूंगा, हाय… मेरा नाम समीर है।”

“मैं अमीना हूँ… हाय !”

“तो आ जाओ …”

मैंने अपने भाई की तरफ़ देखा तो उसने मुस्करा कर हाँ कह दी। हम अपने दोनों ने अपने पैर चीरे और पीछे अपने पैर फ़ैला कर बैठ गये। भाई ने हाथ हिलाया और समीर ने अपनी बाईक आगे बढ़ा दी। समीर के लिये भाई से क्या कहती, पर हाँ वो पट्ठा तो सजीला जवान था। कसी जीन्स और तंग टीशर्ट में वो एक बांका जवान लग रहा था। मेरी इतनी बातों से तो आप समझ ही गये होंगे कि मैं उस पर फ़िदा हो चुकी थी। पीछे बैठे बैठे मैंने अपनी दोनों टांगें उसके कूल्हे पर चिपका दी। बीच बीच में गाड़ी के उछलने पर मैं अपनी कठोर छातियों को उसकी पीठ से दबा देती थी। मेरे ऐसा करने से वो कुछ कुछ समझ रहा था। उसका शरीर कुलबुलाने लगा था। स्टेशन पहुँच कर समीर ने भाई को वहाँ छोड़ दिया।

“अब आपको घर पर छोड़ दूँ?”

“वहाँ अब कौन है, भाई था वो तो चला गया !”

समीर हंस दिया और गाड़ी घर की मोड़ दी रास्ते में एक कॉफ़ी हाउस पड़ता था।

“जल्दी घर जा कर क्या करोगी, क्यों ना हम यहाँ कॉफ़ी पी लें?” एक कॉफ़ी शॉप पर समीर ने बाइक रोकते हुए कहा।

अन्धेरा बढ़ने लगा था। वो मेरे शरीर को ऊपर से नीचे तक यों देख रहा था जैसे कि अन्दर से मैं नंगी कैसी लगूँगी। मैंने भी उसके शरीर का जायजा लिया, खास करके उसके लण्ड के आसपास का। मेरी गाड़ी की हरकतें उसे याद थी, सो वो मुझे फ़्लर्ट करने लगा।

“आप बहुत सुन्दर है अमीना जी !”

“आप तो सीधे ही लाईन मारने लगे?”

“लाइन ही मारी ना … कुछ और तो नहीं?”

“बहुत चालू लगते हो?”

“चालू नहीं… चलें?”

“चलो…”

“अरे वहाँ नहीं, उधर, झाड़ियों के पीछे !”

“धत्त … वहाँ क्या करेंगे?”

“चलो तो सही … वहीं फ़ैसला कर लेंगे !”

मैंने सर झुकाया और दो पल को सोचा- मूड में लगता है यह तो … क्या करूँ?… क्या चोदेगा? … तो फिर झाड़ियों के पीछे ले जाकर क्या करेगा। हाय चलूँ एक बार तो मजे मार लूँ।

“देखो, नो छेड़ा छाड़ी … चलो !”

हम लोग थोड़े से आगे निकल आये… और एक घनी झाड़ी देख कर सावधानी से चारों ओर देखा। बस शाम का धुंधलका था। तभी समीर ने मुझे पकड़ पर अपनी ओर खींच लिया। मैं लहराती हुई उसकी बाहों में चली आई।

“हाय समीर… जरा धीरे से !”

उसके हाथ सीधे मेरी चूचियों पर आ गये। मेरे चिकने गोल गोल से गोले उसके हाथों में मसले जाने लगे। एक खुशी की तरंग सी उठी। तो चुदना तय था। उसने जल्दी से अपने अधर मेरे अधरों से चिपका लिये। एक झुरझुरी सी लहरा गई तन में चूत में खुजली सी चलने लगी। जैसे जैसे वो मेरे स्तन मसलता, मेरी चूत की खुजली बढ़ने लगती। तभी थप से उसका हाथ मेरे गोल मटोल चूतड़ों पर आ जमा। वो उसे मसल मसल कर दबाने लगा। मैं नशे में झूम सी गई। मैंने उसके जीन्स के ऊपर से उसका लण्ड टटोला। साला सख्त हो गया था, पर टाईट जीन्स में वो कसा हुआ था।

“समीर, इस घोड़े को तो आजाद करो !”

उसने अपना बेल्ट ढीला किया… बाकी काम मैंने कर दिया। उसकी जीन्स के बटन खोल कर जिप नीचे खींच दी। फिर उसकी चड्डी और जीन्स एक साथ नीचे उतार दी। ओह्ह, मैया रे … इतना मस्त मोटा लण्ड? मैंने उसे धीरे से थाम लिया।

मेरे मुँह से सिसकी निकल पड़ी। मोटा फ़ूला हुआ सुपाड़ा सीधा सख्त सा तन्ना रहा था। मैंने भी धीरे से अपनी जीन्स नीचे सरका दी।

“समीर बस अब देर ना करो … चोद दो मुझे !”

“अभी नहीं … जरा अपनी चूत का रस तो चख लेने दो !”

“आह्ह्ह … नहीं नहीं ! घर पर देर हो जायेगी।”

पर वो नहीं माना, नीचे सरकते हुए उसने मेरी चूत की नरम सी लकीर के बीच अपना मुख दबा दिया। मैंने उसके बाल जोर से जकड़ लिये। वो मेरी चूत को जीभ तीखी करके सटासट चाटने लगा। मेरी मस्त यौवन कलिका को और मस्त करने लगा। मेरे मुख से खुशियों की किलकारियाँ निकलने लगी। फिर उसने मुझे नीचे खींच लिया और खुद खड़ा हो गया। मुझे नीचे बैठा कर उसने अपना लण्ड मेरे मुख में जबरदस्ती घुसेड़ दिया। क्या मोटा लण्ड है राम जी … मैंने अपनी कसी हुई स्टाईल में उसका लण्ड चूसना शुरू कर दिया। उसके आगे पीछे होने से मुख की चुदाई का अहसास होने लगा था।

“चल चल अमीना लेट जा !” उसने मुझे धीरे से जमीन पर ही लेटा दिया और मेरे ऊपर छाने लगा। तभी उसका मस्त मोटा लण्ड मेरी प्यारी सी चूत में गुदगुदाता हुआ अन्दर उतरने लगा। आह्ह जैसे जन्नत नजर आ गई। मैंने भी अपनी चूत को ऊपर उठा कर उसका लण्ड भीतर लेने लगी। नतीजा यह हुआ कि एक ही बार में मेरी चूत ने उसका पूरा लण्ड खा लिया।

“दे ना … जरा जम के दे… पेल दे चूत को !”

“तू तो मस्त चुदक्कड़ है रानी !”

“उहं … मजा तो पूरा लण्ड लेने में ही है … चल चोद ना !”

उसने धीरे से लण्ड बाहर खींचा …

उह्ह मर गई राम … मजा आ गया ! मैं भीतर तक लहरा उठी।

“अब दूँ क्या जमा कर…”

“दे दे राम … जरा मस्ती से दे दे … ऊऊऊउह्ह्ह्ह्ह … मैया रे … जरा और जोर से…”

“भोसड़ी की गजब की चुदक्कड़ राण्ड है !”

“ऊह्ह्ह्… राण्ड नहीं रण्डी बोल… मादरचोद !”

“अरे वाह गाली भी देती है … तो यह ले भेन की लौड़ी…”

उसने अपनी तेजी दिखाई। उसका लण्ड मेरी चूत में सटासट चलने लगा। मेरी मस्ती भरी सिसकारियाँ मुख से निकलने लगी।

“अरे मर जाऊँ राजा … और तेज … दनादन … चोद दे साले भेन चोद !”

मेरी चूत में खुजली बहुत तेज हो गई थी। मेरी सांसें उखरने लगी थी। मैं चरम सीमा पर पहुँचने लगी थी। मेरी आँखें बन्द हो गई थी। मुख से अनापशनाप बोल निकल रहे थे।

“चुद गई राजा … फ़ाड़ दी मेरी चूत … मेरा तो बाजा बज गया … चोद दे जोर से … निकाल दे सारा पानी … भोसड़ी के … मार दे … ऊह्ह्ह्ह्ह … उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ … राजा … बस …बस … निकल गया मेरा तो… बस कर।”

उसने अब मेरी गोल गोल गाण्ड थपथपाई और मुझे खड़ी कर दिया। मेरी गाण्ड पर से मिट्टी साफ़ की और मेरे दोनों पट चीर दिये।

उफ़्फ़्फ़ … मेरे चूतड़ों की दरार अलग अलग हो गई … मुझसे बिना पूछे ही उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड टिका दिया।

“मस्त गाण्ड है… कितनी नरम है !”

उसका सुपाड़ा छेद में फ़क से घुस गया। उसने बेदर्दी से मेरी गाण्ड का कीमा बनाना चालू कर दिया। पर मुझे तो वो मस्ती की खान लगने लगी थी। तभी एक जोड़ा वहाँ से चुदाई के मूड में गुजरा। हमें गाण्ड मराते देख कर वो रुक गया। पर समीर नहीं रुका। उसने मेरी गाण्ड मारना जारी रखा। मैंने भी उसे घूर कर देखा। वो दोनों मुस्काए … सभ्य लोग थे वो … हमें हाथ हिलाया और चुदाई के लिये आगे दूसरी झाड़ी तलाशने लगे।

उसकी जोरदार गाण्ड चुदाई से मेरी चूत फिर से गरमाने लगी। तभी उसके लण्ड ने ढेर सारा माल उगल दिया।

“हूँ… मेरी गाण्ड चोदने के लिये किसने कहा था।”

“किसी ने नहीं…”

“फिर मेरी गाण्ड मुझसे बिना इज़ाज़त लिये कैसे चोद दी?”

“तुम इतनी जल्दी पट गई थी और चुदवाने के लिये राजी हो गई थी कि मैंने सोचा लगे हाथ तुम्हारी गाण्ड भी बजा ही दूँ !”

“अब मेरी चूत में जोर की खुजली चल रही है वो … उसका क्या करूँ?”

“यहाँ बैठो …”

वो मुझे नीचे बैठा कर मेरी चूत को चूसने लगा। फिर चूत में अपनी दो उंगलियाँ भी फ़ंसा दी।

“अरे मैं मर गई समीर … तू तो आज मुझे मार ही डालेगा। जरा कोमलता से कर … इस दाने को भी खींच खींच कर सहलाता जा … क्या मस्ती है !”

तभी वो जोड़ा वहाँ फिर से आ गया और देखने लगा। मुझे बहुत अजीब सा लगा।

“अह्ह्ह्ह, प्लीज जाइये ना … हमें करने दीजिये !”

“आप दोनों बहुत किस्मत वाले हैं … बॉय बॉय…”

दोनों ठण्डी सांसें भर कर दूसरी तरफ़ चल दिये। दूरी पर मैंने देख लिया था कि वो लड़का लड़की से लिपट चुका था। मैं मुस्करा दी।

तभी मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैंने समीर को धन्यवाद किया। और फिर से उसी कॉफ़ी हाउस में चले आये।

“चलो कॉफ़ी हो जाये !”

इतनी देर में वो जोड़ा हमारे पास से गुजरा और हमें पहचानने की कोशिश करने लगा। अन्धेरे में शायद वो कन्फ़्यूज कर रहा था।

लड़की मुस्करा रही थी … वो हमें पहचान गई थी।

हम दोनों रेस्टोरेन्ट में बैठे ही थे कि वो जोड़ा हमारे सामने आ गया। दोनों ही सभ्य लग रहे थे, बिल्कुल मेरे और समीर की तरह। उन दोनों ने हमें देख कर मुस्कुराहड़ फ़ेंकी। जवाब में हम भी मुस्करा दिये।

दूसरे भाग की प्रतीक्षा करें !

इतने दूसरा भाग आए तो क्यों ना मुझ से फ़ोन पर बात ही कर लें?

यह रहा मेरा फ़ोन नम्बर !

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दोस्त की मम्मी

January 12th, 2012 No comments

प्रेषक : रॉकी सेठ

मेरा नाम रोक्की है, मेरी उम्र 25 साल है और कद 5′7″ है। मैं दिखने में सुन्दर हूँ, कोटा, राजस्थान से हूँ।

मैं अन्तर्वासना साईट का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ इसलिए अपनी जिन्दगी में पहली बार अपनी व्यक्तिगत घटना आपसे बांट रहा हूँ।

मैं एक अच्छे अमीर परिवार से सम्बन्ध रखता हूँ। मैं जहाँ रहता हूँ वो क्षेत्र जवाहर नगर एरिया कहलाता है जो कोटा का पोश एरिया है। मेमे परिवार में मैं और मेरे मात-पिता हैं।

तो यह दो महीने पहले की बात है, मेरे घर के सामने एक नया परिवार रहने आया था। वे केवल तीन ही लोग थे, पति-पत्नी और उनका लड़का विक्की जो मुझसे सिर्फ दो साल छोटा है। तो उस लड़के से मेरी दोस्ती हो गई। उसके पिता एक दवा कम्पनी में बिक्री विभाग में हैं और मम्मी घरेलू महिला ! विक्की की मम्मी शोभा आंटी थोड़ी मोटी हैं लेकिन लगती अभी तक काफ़ी गर्म माल लगती हैं पर मैंने कभी उन्हें गलत निगाह से नहीं देखा था मैं हमेशा उनसे आंटी कह कर बात करता था।

कुछ दिन बाद विक्की होटेल मैनेजमेंट का कोर्स करने बाहर चला गया तो मेरा उनके घर जाना भी कम हो गया।

एक दिन शोभा आंटी मुझे मिली और बोली- विक्की क्या गया, तुमने तो आना ही छोड़ दिया?

मैंने कहा- आंटी जरा व्यस्त हूँ, आज शाम को जरूर आऊँगा…

शाम को मैं शोभा आंटी के घर गया। वो साड़ी में थी। मुझे देखते ही खुश होकर बोली- आओ, मैं भी अकेली बोर हो रही थी !

मैंने पूछा- अंकल कहा हैं?

वो बोली- तेरे अंकल ज्यादातर टूर पर ही रहते हैं।

फिर वो चाय बना कर लाई…

थोड़ी देर बाद बातों बातों में आंटी ने पूछा- कोई गर्लफ़्रेन्ड है या नहीं?

मैंने कहा- शोभा आंटी, अभी ब्रेकअप हुआ है !

आंटी मुस्कुराते हुए बोली- तुम जवान लड़के लडकियों को परेशान करते होंगे तो ही तो वो भाग गई?

मैंने कहा- परेशान? वो कैसे?

आंटी बोली- आज कल गन्दी-गन्दी फिल्में देखकर वैसी ही डिमांड करते होंगे?

और आंटी हंसने लगी।

यह सुनकर मैं धक से रह गया और मेरा लण्ड भी खड़ा हो गया। अब पहली बार मेरे मन में आंटी के लिए गलत ख्याल आ रहे थे। इतने में आंटी का फ़ोन आ गया और मैं वापिस आ गया।

उस रात मुझे नींद नहीं आई और मैंने तीन बार आंटी को सोच कर मुठ मारी…

कुछ दिन बाद मेरे मम्मी-पापा शादी में बाहर चले गए तो मैं घर पर अकेला रह गया और पूरा दिन सिर्फ अश्लील फिल्में देखता रहा।

शाम को शोभा आंटी मिली तो मैंने हेलो किया। बातों में मैंने बताया कि मैं घर पर अकेला हूँ।

उन्होंने कहा कि उनके पति भी बाहर गए हैं।

रात ठीक नौ बजे मेरे घर की घण्टी बजी। मैं बाहर गया तो शोभा आंटी खड़ी थी, बोली- दही चाहिए !

थोड़ी सी है ! मैंने कहा- अंदर आ जाओ आंटी !

और वो अंदर आकर मेरे कमरे में बैठ गई। मैं दही लेकर आया और आंटी मुझसे बात करने लग गई।

आंटी ने काले रंग का गाऊन पहन रखा था, उनके बड़े बड़े चूचे और बड़ी गाण्ड बहुत सेक्सी दिख रही थी। शायद आंटी ने मुझे उनके बदन को चोरी-चोरी देखते हुए देख लिया था। मैंने नेकर पहन रखी था और मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो ही गया था।

आंटी बार बार मुझसे झुक कर बात कर रही थी ताकि मैं उनके वक्ष देख सकूँ।

आंटी बोली- अभी तो तुम अकेले हो ! कोई गलत काम तो नहीं कर रहे हो न?

मैंने कहा- आंटी, गलत? मतलब?

आंटी बोली- कोई गन्दी फिल्म तो नहीं देख रहे हो न?

और हंसने लगी।

मेरे पूरे बदन में कर्रेंट सा फ़ैल गया।

इतने में आंटी ने मेरी नेकर की जिप देख कर कहा- यह इतना मोटा बाहर क्या दिख रहा है?

क्योंकि मेरा लण्ड पूरा खड़ा था तो ज़िप उठी हुई दिख रही थी।

अब मैं भी मूड में आ गया, मैंने कहा- आंटी, आप ही देख लीजिये !

और उनके पास जाकर खड़ा हो गया।

आंटी मेरे बिस्तर पर बैठी थी और जैसे ही मैं उनके पास गया, उन्होंने मेरा लण्ड नेकर के ऊपर से पकड़ लिया और बोली- हाय इतना मोटा है तुम्हारा रॉकी?

और पकड़ कर दबाने लगी।

मैंने कहा- आंटी, अब खोल कर देखो !

उन्होंने मेरी जिप खोली और मेरा बड़ा मोटा लण्ड अपने हाथ में ले लिया। मुझे लगा कि मुझे जीवन की सारी ख़ुशियाँ मिल गई। आंटी अपने नाज़ुक नर्म-मुलायम हाथों से मेरा लण्ड पकड़ कर सहला रही थी।

मैंने भी आंटी की चूचियाँ दबा दी। बहुत बड़ी और मुलायम थी आंटी की चूचियाँ !

अब आंटी और मैं पूरे मूड में आ चुके थे, आंटी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए थे, मैं पूरा नंगा खड़ा था और आंटी मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूस रही थी।

फिर मैंने आंटी को खड़ा किया और उनका गाऊन उतारने लगा तो आंटी हंस कर बोली- अपनी आंटी को नंगा कर रहा है? तुझे शर्म नहीं आती?

और मुझसे चिपक गई। मेरा लण्ड और ज्यादा खड़ा हो गया। मैंने आंटी का गाऊन उतारा तो उन्होंने काली ब्रा और काली ही पैंटी पहन रखी थी। मैं ब्रा उतारकर उनके स्तन चूसने लगा और वो बार बार कहने लगी- जोर से चूस मेरे बच्चे ! और जोर से !

मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था, मैंने अपना एक हाथ आंटी की कच्छी में डाल दिया और उनकी चूत के बालो में हाथ फिराने लगा।

आंटी पूरी गर्म हो चुकी थी और उनकी चूत भी गीली हो रही थी, उन्होंने खुद ही अपनी पैंटी उतार दी और बोली- इसे चाट ना !

मैंने कहा- नहीं, मुझे अच्छा नहीं लगता चूत चाटना !

तो वो बोली- अपनी आंटी की बात नहीं मानेगा?

और मेरा लण्ड पकड़ कर सहलाने लगी।

मैंने कहा- ठीक है !

वो मुझसे दस मिनट तक अपनी चूत चटवाती रही। उनकी चूत पर बाल थे पर गोरी थी उनकी तरह…

आंटी जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी और गर्म साँसें छोड़ रही थी।

फिर मैं आंटी के ऊपर आ गया और अपना लण्ड उनकी चूत पर रगड़ने लगा।

आंटी ने कहा- देखो, हमें कोई देख लेगा तो क्या कहेगा? हम दोनो नंगे हैं !

और मेरे चूतड़ दबाने लगी। आंटी इतनी सेक्सी बातें कर रही थी कि मुझे भी मज़ा आ रहा था, आंटी बोली- रॉकी, अपनी आंटी को धीरे धीरे करना, वरना दर्द होगा ! रॉकी इतना बड़ा लण्ड है तेरा ! धीरे से डाल ! देख तूने आंटी को नंगा कर दिया ! तू मेरे बेटे की उम्र का है ! तुझे शर्म नहीं आती अपने दोस्त की मम्मी को नंगा देखते हुए?

और मेरे कूल्हे जोर से दबाने लगी।

फिर बोली- अब अंदर डाल रॉकी ! धीरे धीरे मैंने अपना लण्ड अंदर डाल दिया और आगे-पीछे होने लगा।

आंटी आहें भर रही थी और मुझे तो जिन्दगी के सारे सुख मिल गए।

थोड़ी देर बाद आंटी झड़ गई और रुकने के लिए बोली।

मैंने कहा- आंटी ! अभी मेरा बाकी है !

आंटी हंस कर बोली- इतनी कम उम्र है और इतना टाइम लगता है? बहुत परेशान कर रहा है तू अपनी नंगी आंटी को !

फिर वो लण्ड को बाहर निकलने की जिद करने लगी- अब मत कर ! मुझे दर्द हो रहा है !

मैंने अपना लण्ड बाहर निकल लिया, मैंने कहा- मै अभी झड़ा नहीं हूँ !

आंटी हंस कर मेरे लण्ड को अपने मुलायम हाथो में पकड़ कर बोली- इसका पानी तो मैं निकलती हूँ ! बहुत बड़ा और शरारती हो गया है यह !

और मेरा लण्ड जोर जोर से सहलाने लगी। थोड़ी देर में आंटी के हाथ में मेरा पानी निकल गया तो आंटी हंस कर बोली- कितना ज्यादा पानी फेंकता हैं ! कितने दिन से बचा कर रखा था? और कितना गाढ़ा है !

और आंटी जोर जोर से हंसने लगी …..

आंटी बाथरूम में चली गई और हाथ धोकर वापस आ गई। मैं तब भी नंगा ही था और आंटी भी नंगी !

आंटी बोली- अब अपनी आंटी को नंगा किया है तो कपड़े भी पहना !

मैंने कहा- आप ऐसे ही अच्छी लग रही हो !

आंटी बोली- बहुत बड़े गुंडे हो तुम ! अपनी आंटी को पूरा गन्दा कर दिया !

और जोर से हंसने लगी….

मैंने कहा- यहीं पर रूक जाओ आज रात !

तो आंटी बोली- ठीक है !

फिर आंटी मेरे घर पर सुबह 4 बजे तक रही और हम दोनों ने 4 बार चुदाई की। आंटी और मैं रात भर नंगे रहे और पोर्न फिल्म देखते रहे….

अब भी आंटी और मैं जब भी मौका मिलता है सेक्स करते हैं लेकिन उससे ज्यादा हम फ़ोन पर सेक्सी बातें करते हैं।

कुछ दिन पहले मैंने आंटी से कहा- अपनी किसी सहेली को भी मुझसे मिलवा दो !

तो पहले तो वो नाराज़ हो गई पर मैंने बाद में उन्हें मना लिया। अब मैं उस दिन का इन्तज़ार कर रहा हूँ जब आंटी अपनी सहेली से मुझे मिलाएँगी।

आप को मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी?

अपने विचार मेरे मेल पर भेजें !

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मेरा दोस्त और उसकी बहन-2

January 12th, 2012 No comments

लेखक : राजू दरजी

दोस्तो, आप सभी लोगों ने मेरी कहानी

मेरा दोस्त और उसकी बहन

को पढ़ा और काफी मेल भी किये, आप सभी का शुक्रिया !

मेरी कहानी की हर घटना सत्य होती हैं बस आप लोगो का अधिक से अधिक मनोरंजन करने के लिए मैं उसमे थोड़ा सा बदलाव करता हूँ। कहानी के बाद मेरे पास बहुत से मेल आते हैं जिनमें यही पूछते हैं कि क्या यह कहानी सच्ची है?

तो मैं आप लोगों को आगे की बात बताता हूँ !

तो हुआ यों कि मैं तो उस दिन चुदाई करके बहुत ही थक गया था क्योंकि मैंने पहली बार किसी की गाण्ड और चूत मारी थी फिर भी दिल नहीं भरा था। मैंने रात उनके घर पर उनके साथ ही गुजारी थी तो सुबह सुबह का समय था मुझे देरी से उठने की आदत है।

उस दिन मैं सोया हुआ था और राज और उसकी बहन उठ गए थे। वे लोग पिछली रात के बारे में बात कर रहे थे। मैं उनकी बात चोरी-छिपे सुन रहा था।

राज की बहन बोल रही थी- तेरा दोस्त तो काफी अच्छी चुदाई कर लेता है !

तो राज बोला- हाँ दीदी, मुझे भी कल मेरी गाण्ड मरवाने में मजा आ गया।

तभी उसकी दीदी ने कहा- तुम्हें तो गाण्ड नहीं मरवानी चाहिए क्योंकि जब कल मैंने रात को गाण्ड मरवाई तो मुझे काफी दर्द हुआ था और तुम तो एक लड़के होकर भी गाण्ड मरवाते हो?

उसने कहा- दीदी, दर्द तो होता है पर मजा भी तो आता ही है ना !दीदी बोली- हाँ, मजा तो आता है पर जो दर्द हम महसूस कर रहे हैं उस दर्द को इसे भी महसूस करना होगा कि कैसा लगता है।

इतना सब सुनकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया, मैंने उठने का बहाना किया। तभी उन दोनों ने अपनी बात पलट दी और उसकी बहन मेरे पास आ कर मुझे चूमने लगी।

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और मैं भी उसे चूमने लगा इतने में राज आया और मेरी पैंट में हाथ डालकर मेरा लौड़ा निकलने लगा।

लौड़ा पूरा खड़ा था और वो चूसने लगा।

आआआआआआअ………… ………हहहहः क्या मजा आ रहा था !

फिर मैंने अपनी पिचकारी उसके मुँह में ही छोड़ दी और बिस्तर पर से उठ गया।

मैंने मुँह धोया।

उसकी दीदी बोली- मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बनाती हूँ !

मैंने कहा- मैं घर जाकर कर लूँगा !

तो उसने कहा- मुझे और चुदवाना है ! और ऐसा मोका बार बार नहीं मिलेगा !

तभी मैंने घर पर फ़ोन किया। पापा ने फोन उठाया, मैंने बोला- पापा, राज की तबीयत थोड़ी ख़राब है तो मैं यहीं पर रुकूँगा और आज स्कूल नहीं जा पाऊँगा।

तो उन्होंने कहा- ठीक है !

मुझे मन ही मन खुशी हो रही थी कि आज फिर से दोनों भाई बहन की गाण्ड मारने मिलेगी।

मैं और राज नहाने जाने के लिए अपने कपड़े उतार रहे थे और उसकी बहन रसोई में नाश्ता बना रही थी।

हम घर में अकेले थे इसलिए दरवाजा खुला रख कर ही पूरे नंगे होकर नहा रहे थे। मैंने राज को और राज ने मुझे नहलाना शुरू किया। उसने मेरा लौड़ा पकड़ लिया मैंने भी उसका लौड़ा पकड़ लिया और आगे पीछे करने लगा। हम दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे। करीब 15 मिनट से हम ऐसे ही कर रहे थे। तभी उसकी बहन आई और बाहर से बोली- नाश्ता लग गया है, चलो !

उसकी बहन को भी नहाना बाकी था तभी मैंने उसकी बहन को अन्दर खीच लिया और उसने गाउन पहन हुआ था तो वो पूरा गीला हो गया, उसने अन्दर कुछ नहीं पहना था, गीले गाऊन के कारण उसके चूचे दिख रहे थे मेरी तो नजर वहीं पर रुक गई और मैं उनको पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा, जितना जोर से हो सका, उतना जोर से दबाता रहा ! वो चिल्लाती रही- आ..आ..आ….आ आआ…आआ..आअ……..हाह्हह्हहहा ! मुझे छोड़ दो ! दर्द हो रहा है !

पर मैंने नहीं छोड़ा. फिर मैंने उसकी चुम्मी ले ली और उसे नंगा कर दिया।

तब हम तीनों नंगे खड़े थे और एक दूसरे को चूम रहे थे।

मैंने उसे नीचे झुका कर अपना लौड़ा चुसवाना शुरू किया और राज को कहा- तू अपनी बहन की गाण्ड मार !

तो वो मना करने लगा। तो उसकी बहन ने कहा- लौड़े की दुम ! चुदवाता ही रहेगा या चोदेगा भी कभी? आ जा ! मेरी मार आज ! जम के मारना !

राज, मैं और उसकी बहन बाथरूम से बाहर आये और एक दूसरे का बदन पौंछा और बिस्तर पर चले गए। पिछली रात को मैं जो तीन निरोध लेकर आया था, एक पिछली रात को उपयोग किया था और दो शेष थे।

एक मुझे उसकी बहन ने पहनाया और एक राज को पहनाया। दोनों चॉकलेट स्वाद के थे तो अब वो मेरा लौड़ा अच्छे से चूस रही थी, मुझे मजा आ रहा था। राज उसकी चूत चाट रहा था।

कुछ देर के बाद राज मेरा लौड़ा लेने लगा और वो राज का लौड़ा !

मेरा लौड़ा गीला हो गया तो राज लेट गया और उसकी बहन उसके लौड़े पर बैठ गई। वो मेरा लौड़ा चूसे जा रही थी और धीरे-धीरे उसके लौड़े पर बैठ रही थी। उसकी आवाज नहीं आ रही थी क्योंकि उसने मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले रखा था।

इस बीच उसने मेरा लौड़ा निकाला अपने मुँह से और राज को चूमने लगी। राज भी उसे अच्छे से चोद रहा था।

मैंने उसके चूचो को चुसना शुरू किया फिर थोड़ी देर के बाद उसके मुँह में फिर से लौड़ा घुसा दिया।

मैं सोच रहा था कि साले दोनों भाई बहन कैसे योजना बना रहे हैं सुबह से मुझे दर्द महसूस करवाने का कि देख कैसे दर्द होता है गाण्ड मरवाने में !

मैं उठा और उसकी गाण्ड में जाकर अपना लौड़ा डाल दिया।

वो दर्द से चीख उठी क्योंकि उसने कभी भी दो लण्ड एक साथ नहीं लिए थे। मैं जोर जोर से झटके मार रहा था और उसकी गाण्ड से खून निकलने लगा था, शायद उसकी गाण्ड फट गई थी क्योंकि उसकी गाण्ड में मैंने एकदम से लौड़ा डाल दिया था इसलिए वो चिल्लाती रही- ऊऊ …आआ ….ऊउ…..ह्ह्ह…….मैं….मर…..जाऊँगी…. .ई.ईई….ईईइ..प्प्ल……ल्ज्ज. …ओह…मैं…..मर…..जाऊँगी……. प्ल्ज़……गोड…..आआ…..ऊउ…ह्ह्ह…..

और उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे पर मैं अपनी धुन में उसे पूरी तेजी से चोदता रहा, वो चीखती रही, रोती रही।

राज ने अपना लौड़ा निकला और उसके मुंह में दे दिया। मैं उसकी गाण्ड पर ही वार किये जा रहा था। राज उसके मुंह में झड़ गया, मैंने लौड़ा बाहर निकाला और निरोध हटा दिया। मैंने फिर से उसकी गाण्ड में लौड़ा डाल कर उसकी चुदाई की, लौड़ा बार बार निकाल कर अन्दर-बाहर करने लगा।

फिर उसे गोद में लेकर चोदने लगा पर उसका वजन ज्यादा होने के कारण ज्यादा देर तक नहीं चोद पाया, उसे बिस्तर पर लेटा कर दोनों पैर अपने कंधों पर रख कर चोदता रहा।

मैंने आज उसकी चूत नहीं मारी केवल गाण्ड मारता रहा

फिर मैं झड़ने वाला था, वो भी पानी छोड़ चुकी थी पर मैं उसे चोदता रहा जोर जोर से और झड़ गया।

राज का लौड़ा फिर से तैयार हो गया था तो मैंने अपना लौड़ा निकाला तो राज उस पर चढ़ गया और चोदने लगा।

मैं आगे उसके चेहरे के पास गया तो देखा कि वो रो रही थी।

मैंने उसको चूमा और लौड़ा उसके मुँह में दे दिया। मेरा लौड़ा फिर तैयार हो गया था। मैं उठा और उसके मुँह में जोर जोर से लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगा। एक बार तो पूरा ही अन्दर डाल दिया तो वो तड़प गई तो मैंने निकाल लिया।

फ़िर मैं उठ कर राज के पीछे गया, राज अपनी दीदी को चोद रहा था, मैंने उसकी गाण्ड चाटना शुरू किया, उसे अच्छा लग रहा था। फिर मैंने उसकी गाण्ड में उंगली करना शुरू किया। उसका छेद जैसे ही खुला, मैंने लौड़ा उसकी गाण्ड में डाल दिया। वो अपनी बहन को और मैं उसको चोद रहा था।

कुछ देर में वो झड़ने वाला था, मैं भी चोदता रहा और वो झड़ गया, उसकी गाण्ड को मैं चोद रहा था, उसकी बहन और वो दोनों चिल्ला रहे थे- चोदो… आआअ……. ऊऊउ….. आअ….. ऊ……. ओ हू होहह…….जोर से ! जोर से !

मैं चोदता रहा।

फिर मैंने लौड़ा उसकी गाण्ड से निकाला, वो उठा तो मैंने फिर से उसकी बहन की गाण्ड में ही अपना लौड़ा डाल दिया।वो फिर से रोने लगी- मत करो प्लीज़ ! अब तो मुझे छोड़ दो ! प्लीज़ !

मैं चोदता रहा पर अचानक पीछे से राज मेरी गाण्ड चाटने लगा। मुझे मजा आ रहा था, वो चाटता रहा। और अचानक उसने मेरी गाण्ड में उंगली डाल दी। मैं दर्द के मारे धीरे हो गया क्योंकि पहली बार किसी ने मेरी गाण्ड में उंगली की थी वरना मैं ही करता था। वो उंगली अन्दर-बाहर करने लगा। मुझे दर्द हो रहा था, मेरे मुँह से आवाज निकल रही थी- आआ…..ऊऊऊ……..

आआ…इसे निकालो !

पर उसने मेरी एक ना सुनी। मैं भी उसकी बहन को जोर जोर से घस्से मारने लगा तो प्रतिउत्तर में उसने दो उंगलियाँ डाल दी। मेरा दर्द बढ़ गया और मेरे मुंह से और उसकी दीदी के मुँह से आवाजें निकलती रही।

मैं उसकी गाण्ड में ही दूसरी बार भी झड़ लिया और जैसे ही मैं उठा, उसने उंगली निकाल ली। मुझे बहुत दर्द हो रहा था पर मजा तो तब आया जब राज की दीदी की गाण्ड से खून के साथ साथ तीन बार मरी गाण्ड का माल निकला। दो बार मैंने छोड़ा था उसकी गाण्ड में और एक बार उसके भाई राज ने छोड़ा था !

क्या मस्त धार निकली थी ! उसकी गाण्ड पूरी तरह से हमारे माल से भर गई थी और मोटी हो गई थी, अब सारा माल बाहर आ रहा था और राज उसे चाट रहा था।

मैं अपना लौड़ा पकड़ कर हिला रहा था। इस तरह मेरी भी गाण्ड मरी !

मैंने इन लोगों की नाश्ता करने के बाद भी मारी और रात को भी मारी पर रात में मजा दुगना हो गया था !

वो कैसे?

वो अगली कहानी में ….

आपका राजू दरजी कॉल बॉय

ईमेल जरूर करिएगा और बताइएगा कि कहानी कैसी लगी?

rajudrj1@gmail.com

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